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Lucknow: छापा पड़ते ही डॉक्टरों ने व्हाट्सएप पर भेजा इस्तीफा, एफएसडीए ने कहा- मान्य नहीं
Tue, 19 Jul 2022 05:28 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 19 Jul 2022 05:28 PM IST
सार
ब्लड बैंक के पंजीकरण के वक्त जिन डॉक्टरों ने अपने दस्तावेज लगाए थे उन्होंने छापा पड़ते ही अपना इस्तीफा भेज दिया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी लखनऊ में खून के अवैध कारोबार में शामिल डॉक्टर बचने के सभी हथकंडे अपना रहे हैं। जिन डॉक्टरों ने चैरिटेबल ब्लड बैंक के पंजीकरण के वक्त अपने लाइसेंस लगाए थे, उन्होंने छापा पड़ते ही ब्लड बैंक संचालक को व्हाट्सएप पर अपना इस्तीफा भेज दिया। हालांकि, एफएसडीए विभाग के अफसरों का कहना है कि व्हाट्सएप पर भेजा गया इस्तीफा मान्य नहीं है।
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ठाकुरगंज स्थित मिड लाइफ हॉस्पिटल पर बीते माह एसटीएफ-एफएसडीए की टीम ने छापा मारा था। यहां से करीब 302 यूनिट खून जब्त किया गया था। यह खून दूसरे राज्यों से बिना तापमान मेंटेन किए लाया गया था। ब्लड बैंक के पंजीकरण के वक्त जिस डॉक्टर ने अपने दस्तावेज लगाए थे, उन्होंने छापे की सूचना मिलते ही संचालक के व्हाट्सएप नंबर पर इस्तीफा भेज दिया। टीम ने ब्लड बैंक में जांच पड़ताल की तो चला कि डॉक्टर लद्दाख की सैर पर गए हैं।
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इसी तरह कई अन्य निजी ब्लड बैंकों में जिन डॉक्टरों के लाइसेंस लगे थे, वह भी अपना इस्तीफा भेज रहे हैं, ताकि वह न फंसे। एफएसडीए के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश यादव के मुताबिक, इस्तीफा व्हाट्सएप पर डाला जाना मान्य नहीं है। इसकी सूचना एफएसडीए को दी जानी चाहिए थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्त के नमूने फेल होने पर जिन डॉक्टर-स्टाफ के लाइसेंस लगे थे, सभी पर मुकदमा दर्ज होगा।
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17 दिन बाद भी नहीं आई जांच रिपोर्ट
ड्रग विभाग ने चारों ब्लड बैंकों से नमूने एकत्र करके जांच के लिए पीजीआई भेजे थे। करीब 17 दिन बीतने के बाद भी अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे में इन ब्लड बैंकों के लाइसेंस निरस्त किए जाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।