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UP News: महिला के पेट से पांच किलो का ट्यूमर निकाल बचाई जान, चार घंटे तक चला जटिल ऑपरेशन; गर्भाशय से चिपका था

Sun, 12 Jan 2025 03:09 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 12 Jan 2025 03:09 PM IST
सार

सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला के पेट से पांच किलो का ट्यूमर निकालकर उसकी जान बचाई। चार घंटे तक जटिल ऑपरेशन चला। यह गर्भाशय से चिपका था। 

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doctors removed five-kilo tumor from woman stomach In Lucknow complicated operation lasted for four hours
महिला का ऑपरेशन करते चिकित्सक। (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राजधानी लखनऊ में सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चेदानी से चिपके करीब पांच किलो का ट्यूमर निकालकर महिला को नई जिंदगी दी है। यह ट्यूमर दिल से पैर तक खून पहुंचाने वाली धमनी से जुड़ा था। ट्यूमर का आकार और वजन बढ़ने से महिला को मल, मूत्र त्यागने में दिक्कत आ रही थी। डॉक्टरों के मुताबिक इस ट्यूमर को चिकित्सीय भाषा में सब सिरोसल फाइब्राइड कहा जाता है।

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सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव व सर्जन डॉ. आनंद मिश्र ने बताया कि देवरिया की 50 वर्षीय महिला को परिजन ओपीडी ले गए। यहां जांच में ट्यूमर बच्चेदानी से चिपका मिला। इससे महिला को कब्ज की शिकायत व पेशाब में जलन भी रहती थी। डॉक्टरों ने करीब चार घंटे तक ऑपरेशन कर ट्यूमर निकाल दिया। एनिमिक होने से महिला को कई यूनिट खून भी चढ़ाया गया।
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डॉ. आनंद ने बताया कि पेट में फैले इस ट्यूमर को दिल से पैरों तक खून पहुंचाने वाली धमनी इनफिरिअर वेनाकोवा (आईवीसी) से खून की आपूर्ति होने से आकार बढ़ रहा था। यह ट्यूमर आंत के साथ ही आईवीसी, एब्डामल एरोटा धमनी, यूरेटर को दबा रहा था। महिला ने पहले भी ट्यूमर को ऑपरेट कराया था, पर वह कुछ वर्ष में फिर से बढ़ गया। ऑपरेशन बाद महिला स्वस्थ है।

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इनका रहा सहयोग

सर्जरी टीम में डॉ. आनंद मिश्रा, रेजिडेंट डॉ. सचिन कुमार, एनेस्थीसिया डॉ. एसके सिंह, ओटी टेक्नीशियन सुदेश कुमार व सविता चौधरी शामिल रहीं।

...इसलिए चुनौती भरा था ऑपरेशन

डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया ट्यूमर आंतों से चिपका था। साइज लिवर तक पहुंचने से ट्यूमर को सभी बड़ी खून की नलियों से आपूर्ति हो रही थी। ट्यूमर से पेशाब नली दबी थी। ऐसे में इन सभी नली व आंतों को छुड़ाना चुनौती भरा था। इसमें आंतों के फटने व अधिक रक्तस्त्राव होने की संभावना थी।

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