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पीजीआई में बिना सीना खोले बदल दिया दिल का वॉल्व, 2016 में शुरू हुई थी तकनीक

Fri, 05 Jun 2020 03:43 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 05 Jun 2020 03:43 PM IST
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doctors of PGI changed heart valve without opening chest
प्रतीकात्मक तस्वीर
कोराना काल में पीजीआई के डॉक्टरों ने बिना सीना खोले दिल का वॉल्व बदलकर मरीज की जान बचा ली। मरीज की उम्र 65 वर्ष होने की वजह से बिना ट्रांस कैथेटर हार्ट वॉल्व इंप्लांट किया गया। मरीज रजनीश को काफी समय से सांस की समस्या थी।
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जांच में एरोटिव वॉल्व और दिल के मुख्य आउटलेट वॉल्व के बीच रुकावट थी। मरीज की कोविड-19 की जांच निगेटिव आने के बाद वॉल्व बदलने का फैसला लिया गया। आमतौर पर यह ओपन हार्ट सर्जरी के जरिए किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों ने मरीज की उम्र को देखते हुए इसे ट्रांसकैथेटर वॉल्व लगाने का फैसला लिया। इस तकनीक को प्रो. पीके गोयल और प्रो. रूपाली खन्ना ने आंजाम दिया।
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अब तक इस तकनीक से की जा चुकी हैं 25 सर्जरी
ट्रांसकैथेटर वॉल्व रोपण एक नई तकनीक है। 2016 में पहली बार कार्डियालॉजी विभाग के प्रो. पीके गोयल ने इसे शुरू किया। अब तक इस तकनीक से 25 सर्जरी की जा चुकी हैं। इसमें पैर की बड़ी धमनी (आर्टरी) के माध्यम लगभग 3 सेमी व्यास का  वाल्व दिल में स्थापित किया जाता है। मरीज को 3 सप्ताह से अधिक समय तक भर्ती रखा गया था।
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