मिसाल: कोई मासूम को छोड़ कोरोना संक्रमितों की सेवा में तो कोई परिवार से दूर रहकर निभा रहा फर्ज
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कोरोना संक्रमण के दौर में जब हर तरफ से दुखदायी खबरें आ रही हैं तो ऐसे में कुछ वाकये मानवीयता और भविष्य के प्रति नई उम्मीदें भी जगा रहे हैं। कुछ लोगों ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा की नई परिभाषा गढ़ी है। समाज में कोरोना योद्धा किस तरह के अपने फर्ज के आगे परिवार को भी भूल बैठे हैं, ऐसे ही कुछ किस्से यहां हम आपको बता रहे हैं।
नर्स रिचा ने दी नई मिसाल
बख्शी का तालाब के राम सागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पिछले 28 दिनों से अपने परिवार से दूर रहकर कोरोना वायरस पीड़ित मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इनकी ड्यूटी एक अप्रैल को लगी थी, तब से ये लोग यहीं हैं। स्टाफ नर्स रिचा के पति विवेक शुक्ला बलरामपुर अस्पताल में काम करते थे। इसी साल फरवरी में उनकी मौत हो गई। रिचा का 4 साल का एक पुत्र आदी है।
उनका मायका गौरीगंज अमेठी और ससुराल सुल्तानपुर में है। अपने बेटे को मायके में छोड़ कर वह पिछले 28 दिनों से लगातार रामसागर मिश्रा अस्पताल में कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों का इलाज कर रही हैं।
रामसागर मिश्रा अस्पताल में 25 सदस्यीय स्वास्थ्य कर्मियों की टीम के लीडर और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. गिरीश चंद्र पांडे पिछले 28 दिनों से अपनी पत्नी अंशु पांडे और 13 साल की पुत्री अनन्या से दूर रहकर मरीजों की सेवा में लगे हैं।
इसी प्रकार अस्पताल के नोडल ऑफिसर डॉ. सुमित कुमार महाराज अपनी पत्नी मृदुला शर्मा और पुत्री शुभी और शांभवी से पिछले 28 दिनों से दूर हैं। इन दोनों डॉक्टरों की सेवा और मेहनत का ही परिणाम है कि अस्पताल से करोना वायरस से पीड़ित 29 मरीज अब तक स्वस्थ होकर घर लौट गए हैं।
इन दोनों डॉक्टरों स्टाफ नर्स और सफाईकर्मियों की इस लगन की सराहना उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, सांसद कौशल किशोर, विधायक अविनाश त्रिवेदी सहित कई जनप्रतिनिधि कर चुके हैं।
माता-पिता के अंतिम दर्शन भी न कर सके, काम में जुटे
राम सागर मिश्रा अस्पताल में सफाईकर्मी के पद पर काम करने वाले दिलीप कुमार जसवंतनगर बिसवा सीतापुर के पिता लाल दास की 15 अप्रैल को मौत हो गई, इसके बावजूद दिलीप कुमार लगातार अस्पताल में कोरोना वायरस पीड़ित मरीजों की सेवा में लगे हैं।
इसी अस्पताल में मुन्ना अरोड़ा निवासी बिसवा सीतापुर सफाईकर्मी के पद पर तैनात हैं। मुन्ना की माता सुनीता कुमारी की कुछ दिनों पहले मौत हो गई है, इसके बावजूद मुन्ना लगातार 28 दिनों से घर-परिवार से दूर रहकर कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों की सेवा में लगे हैं।