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मुख्यमंत्री से मिले आईएमए के प्रतिनिधि, क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट के हरियाणा मॉडल पर डॉक्टर तैयार
Sat, 06 Apr 2019 07:11 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 06 Apr 2019 07:11 PM IST
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यूपी में क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट हरियाणा मॉडल के अनुसार लागू हो सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रतिनिधि मंडल ने कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से मिलकर इस पर चर्चा की थी। यूपी में भी 8 जुलाई 2016 को एक्ट लागू किया गया था लेकिन डॉक्टरों के विरोध के बाद उसके क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई थी।
उत्तर प्रदेश में क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट को लागू करने के प्रयास चल रहे हैं। इस बार आईएमए की राय है कि प्रदेश में हरियाणा मॉडल को अपनाया जाए।
इसमें 50 बेड के ऊपर के अस्पतालों को एक्ट के दायरे में लाया गया है। जिससे छोटे क्लीनिक और नर्सिंग होम को राहत मिल गई है। यूपी आईएमए के अध्यक्ष डॉ.एएम खान ने बताया कि मुख्यमंत्री से लगभग एक सप्ताह पहले मुलाकात हुई थी।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को एक्ट में शामिल कठिनाईयों को चिकित्सकों के साथ बैठकर दूर करने के लिए कहा था। इससे उम्मीद बंधी है कि इस बार चिकित्सकों के लिए बड़ी परेशानी बने क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट से कुछ राहत मिल सकेगी।
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उत्तर प्रदेश में क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट को लागू करने के प्रयास चल रहे हैं। इस बार आईएमए की राय है कि प्रदेश में हरियाणा मॉडल को अपनाया जाए।
इसमें 50 बेड के ऊपर के अस्पतालों को एक्ट के दायरे में लाया गया है। जिससे छोटे क्लीनिक और नर्सिंग होम को राहत मिल गई है। यूपी आईएमए के अध्यक्ष डॉ.एएम खान ने बताया कि मुख्यमंत्री से लगभग एक सप्ताह पहले मुलाकात हुई थी।
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उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को एक्ट में शामिल कठिनाईयों को चिकित्सकों के साथ बैठकर दूर करने के लिए कहा था। इससे उम्मीद बंधी है कि इस बार चिकित्सकों के लिए बड़ी परेशानी बने क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट से कुछ राहत मिल सकेगी।
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डॉ. एएम खान ने बताया कि एक्ट में है कि यदि कोई इमरजेंसी मरीज आए तो उसे फर्स्ट एड देकर राहत पहुंचाई जाए, इसके बाद उसे रेफर किया जाए। लेकिन ऐसे नर्सिंग होम जहां सिर्फ स्त्री एवं प्रसूति रोग के इलाज की सुविधा हो वहां हार्ट की बीमारी के इमरजेंसी मरीज को कैसे राहत पहुंचाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि सीएमओ के पास डॉक्टर व क्लीनिक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है लेकिन कई जिलों के सीएमओ डॉक्टरों को परेशान कर रहे हैं। इसके कारण आगरा में हड़ताल की नौबत आ गई थी। सीएमओ 2002 में हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध जा रहे हैं। सिर्फ पंजीकरण के आदेश में नए-नए नियम जोड़े जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सीएमओ के पास डॉक्टर व क्लीनिक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है लेकिन कई जिलों के सीएमओ डॉक्टरों को परेशान कर रहे हैं। इसके कारण आगरा में हड़ताल की नौबत आ गई थी। सीएमओ 2002 में हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध जा रहे हैं। सिर्फ पंजीकरण के आदेश में नए-नए नियम जोड़े जा रहे हैं।
इन मानकों का है विरोध
एक्ट में डिप्लोमा स्टाफ को रखने का प्रावधान है। जबकि चिकित्सक ट्रेंड स्टाफ का मानक लागू कराना चाहते हैं। उनका कहना है कि डिप्लोमा डिग्री धारी सरकार के पास नहीं हैं। हम कहां से लाएंगे।
एक्ट में क्लीनिक, नर्सिंग होम, अस्पताल खोलने के लिए 27 तरीके की एनओसी चाहिए। डीएम को रजिस्ट्री अथॉरिटी बनाया गया है। जबकि चिकित्सक सीएमओ को अथॉरिटी रखना चाहते हैं। प्रत्येक तीसरे महीने रिपोर्ट्स को वेबसाइट पर अपलोड करने का विरोध भी चिकित्सकों ने किया है।
एक्ट में क्लीनिक, नर्सिंग होम, अस्पताल खोलने के लिए 27 तरीके की एनओसी चाहिए। डीएम को रजिस्ट्री अथॉरिटी बनाया गया है। जबकि चिकित्सक सीएमओ को अथॉरिटी रखना चाहते हैं। प्रत्येक तीसरे महीने रिपोर्ट्स को वेबसाइट पर अपलोड करने का विरोध भी चिकित्सकों ने किया है।