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Lucknow News: बच्चों में बार-बार पेशाब आने, बहुत प्यास लगने के लक्षण को न करें अनदेखा
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज होने पर बार-बार पेशाब आने, बहुत प्यास लगने और तेजी से वजन घटने जैसे लक्षण दिख सकते हैं। इन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और इंसुलिन से इलाज बेहद जरूरी है। ये जानकारी पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमान ने दी।
रविवार को पीजीआई के टेलीमेडिसिन ऑडिटोरियम में आयोजित पीडियाट्रिक एंडो क्लीनिक्स में निदेशक डॉ. आरके धीमान ने कहा कि प्रदेश में बच्चों और किशोरों की आबादी लगभग 10 करोड़ है। ऐसे में विशेषज्ञ बाल चिकित्सा सेवाओं का विस्तार जरूरी है। पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष क्लीनिक संचालित होता है। यहां बच्चों और उनके परिजनों को बीमारी संभालने, इंसुलिन के प्रयोग और नियमित देखभाल की जानकारी दी जाती है। संतुलित दिनचर्या, नियमित ब्लड शुगर जांच और डॉक्टर की सलाह से इलाज जारी रखना जरूरी है।
हार्मोन के बिगड़ने से बच्चों की सेहत पर खतरा
डॉ. आरके धीमान ने कहा कि बच्चों में हार्मोन के बिगड़ने पर उनकी सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इससे थायरॉइड की बीमारी, मोटापा और टाइप-1 डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, हड्डियों और खनिजों से जुड़ी गड़बड़ी के कारण बच्चों की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। बार-बार फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों की लंबाई का सही गति से नहीं बढ़ना और उम्र के मुताबिक शारीरिक विकास न होना भी हार्मोन संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।
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ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चों को विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। इसके अलावा बच्चों में हार्मोन संबंधी दूसरी समस्याओं में लंबाई का सही गति से न बढ़ना, समय से पहले या देर से यौवन आना, थायरॉइड की समस्या भी हो सकती है। पीजीआई में राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत ग्रोथ हार्मोन थेरेपी भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है।
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रविवार को पीजीआई के टेलीमेडिसिन ऑडिटोरियम में आयोजित पीडियाट्रिक एंडो क्लीनिक्स में निदेशक डॉ. आरके धीमान ने कहा कि प्रदेश में बच्चों और किशोरों की आबादी लगभग 10 करोड़ है। ऐसे में विशेषज्ञ बाल चिकित्सा सेवाओं का विस्तार जरूरी है। पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष क्लीनिक संचालित होता है। यहां बच्चों और उनके परिजनों को बीमारी संभालने, इंसुलिन के प्रयोग और नियमित देखभाल की जानकारी दी जाती है। संतुलित दिनचर्या, नियमित ब्लड शुगर जांच और डॉक्टर की सलाह से इलाज जारी रखना जरूरी है।
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हार्मोन के बिगड़ने से बच्चों की सेहत पर खतरा
डॉ. आरके धीमान ने कहा कि बच्चों में हार्मोन के बिगड़ने पर उनकी सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इससे थायरॉइड की बीमारी, मोटापा और टाइप-1 डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, हड्डियों और खनिजों से जुड़ी गड़बड़ी के कारण बच्चों की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। बार-बार फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों की लंबाई का सही गति से नहीं बढ़ना और उम्र के मुताबिक शारीरिक विकास न होना भी हार्मोन संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।
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ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चों को विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। इसके अलावा बच्चों में हार्मोन संबंधी दूसरी समस्याओं में लंबाई का सही गति से न बढ़ना, समय से पहले या देर से यौवन आना, थायरॉइड की समस्या भी हो सकती है। पीजीआई में राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के तहत ग्रोथ हार्मोन थेरेपी भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है।