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Lucknow News: कर्मचारियों से वसूली कर नुकसान की भरपाई कर रहीं डीएल एजेंसियां
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कर्मचारियों से वसूली कर नुकसान की भरपाई कर रहीं डीएल एजेंसियां
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परिवहन विभाग का मामला
45 रुपये प्रति डीएल मिल रहे, खर्च हो रहे करीब 60 रुपये
प्रतिमाह दो लाख डीएल कार्ड हो रहे प्रिंट व डिलीवर, 30 लाख का प्रतिमाह नुकसान
माईसिटी रिपोर्टर
लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली एजेंसियों को प्रतिमाह करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्हें प्रति कार्ड 45 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि प्रिंटिंग व डिलीवरी आदि में खर्च करीब 60 रुपये का आ रहा है। पिछले सात महीने में एजेंसियों ने 2.10 करोड़ रुपये का नुकसान उठाया है। सूत्र बताते हैं कि प्राइवेटकर्मियों से नियुक्ति व सैलरी के नाम पर वसूली के लिए डीएल एजेंसियां नुकसान को भी उठाने के लिए तैयार हैं।
सिल्वर टच, रोजमार्टा, फोकाम, इन तीन एजेंसियों को प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने व आवेदकों के घरों तक डिलीवर करने की जिम्मेदारी साैंपी गई है। परिवहन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि एजेंसियों को प्रतिकार्ड 45 रुपये दिए जाते हैं। प्रतिमाह दो लाख के आसपास स्मार्ट डीएल बनाए जाते हैं, जिन्हें प्रिंट व डिलीवर करने की जिम्मेदारी एजेंसियों के पास है। ऐसे में प्रत्येक एजेंसी 70 हजार के आसपास डीएल बनाती है। खास बात यह है कि एजेंसियों को प्रत्येक कार्ड पर 15 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एजेंसी प्रतिनिधियों ने बताया कि एक कार्ड पर करीब 60 रुपये का खर्च आ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि डीएल एजेंसियां नुकसान में काम करने को क्यों तैयार हैं। लगातार हो रहे नुकसान को लेकर एजेंसियां आवाज क्यों नहीं उठा रही हैं, आपत्तियां क्यों नहीं दर्ज करवा रही हैं। इस मुद्दे को लेकर परिवहन विभाग अफसर इसलिए कुछ भी बोलने से बच रहे हैं कि विभाग को सस्ती दर पर स्मार्ट डीएल की सुविधा मिल रही है। जिससे विभाग के खर्च बच रहा है।
नुकसान की भरपाई के लिए अपना रहे ये हथकंडे
सूत्र बताते हैं कि सिल्वर टच, रोजमार्टा, फोकाम लिमिटेड को प्रतिमाह करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। पिछले सात महीने में 2.10 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इस नुकसान की भरपाई के लिए प्राइवेटकर्मियों की नियुक्ति पर तीन से चार लाख रुपये वसूले गए। उनसे सैलरी का पैसा भी एडवांस में लिया जा रहा है। कम्प्यूटर व अन्य उपकरण कर्मियों से ही लगवाए गए। इतना ही नहीं अब उन पर आवेदकों से वसूली का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि उनसे मंथली वसूली हो सके।
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स्मार्ट चिप ने कई बार उठाई थी आवाज
गत वर्ष नवंबर से पूर्व प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की जिम्मेदारी स्मार्ट चिप कंपनी के पास था। कंपनी से जुड़े रहे प्रतिनिधियों की मानें तो उस वक्त प्रतिकार्ड 27 रुपये मिलते थे, जबकि खर्च 45 से 50 रुपये आता था। लेकिन इस नुकसान को लेकर कई बार परिवहन मंत्री, आयुक्त आदि के समक्ष आवाज उठाई गई।
सीएम के हस्तक्षेप से खुलेगा भ्रष्टाचार
पीड़ित प्राइवेटकर्मियों की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय से वसूली, भ्रष्टाचार व लूट की शिकायतें की गई हैं। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप से डीएल एजेंसियों का भ्रष्टाचार उजागर होगा। इसके लिए एलआईयू जांच शुरू हो चुकी है।
45 रुपये प्रति डीएल मिल रहे, खर्च हो रहे करीब 60 रुपये
प्रतिमाह दो लाख डीएल कार्ड हो रहे प्रिंट व डिलीवर, 30 लाख का प्रतिमाह नुकसान
माईसिटी रिपोर्टर
लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली एजेंसियों को प्रतिमाह करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्हें प्रति कार्ड 45 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि प्रिंटिंग व डिलीवरी आदि में खर्च करीब 60 रुपये का आ रहा है। पिछले सात महीने में एजेंसियों ने 2.10 करोड़ रुपये का नुकसान उठाया है। सूत्र बताते हैं कि प्राइवेटकर्मियों से नियुक्ति व सैलरी के नाम पर वसूली के लिए डीएल एजेंसियां नुकसान को भी उठाने के लिए तैयार हैं।
सिल्वर टच, रोजमार्टा, फोकाम, इन तीन एजेंसियों को प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट करने व आवेदकों के घरों तक डिलीवर करने की जिम्मेदारी साैंपी गई है। परिवहन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि एजेंसियों को प्रतिकार्ड 45 रुपये दिए जाते हैं। प्रतिमाह दो लाख के आसपास स्मार्ट डीएल बनाए जाते हैं, जिन्हें प्रिंट व डिलीवर करने की जिम्मेदारी एजेंसियों के पास है। ऐसे में प्रत्येक एजेंसी 70 हजार के आसपास डीएल बनाती है। खास बात यह है कि एजेंसियों को प्रत्येक कार्ड पर 15 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एजेंसी प्रतिनिधियों ने बताया कि एक कार्ड पर करीब 60 रुपये का खर्च आ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि डीएल एजेंसियां नुकसान में काम करने को क्यों तैयार हैं। लगातार हो रहे नुकसान को लेकर एजेंसियां आवाज क्यों नहीं उठा रही हैं, आपत्तियां क्यों नहीं दर्ज करवा रही हैं। इस मुद्दे को लेकर परिवहन विभाग अफसर इसलिए कुछ भी बोलने से बच रहे हैं कि विभाग को सस्ती दर पर स्मार्ट डीएल की सुविधा मिल रही है। जिससे विभाग के खर्च बच रहा है।
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नुकसान की भरपाई के लिए अपना रहे ये हथकंडे
सूत्र बताते हैं कि सिल्वर टच, रोजमार्टा, फोकाम लिमिटेड को प्रतिमाह करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। पिछले सात महीने में 2.10 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इस नुकसान की भरपाई के लिए प्राइवेटकर्मियों की नियुक्ति पर तीन से चार लाख रुपये वसूले गए। उनसे सैलरी का पैसा भी एडवांस में लिया जा रहा है। कम्प्यूटर व अन्य उपकरण कर्मियों से ही लगवाए गए। इतना ही नहीं अब उन पर आवेदकों से वसूली का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि उनसे मंथली वसूली हो सके।
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स्मार्ट चिप ने कई बार उठाई थी आवाज
गत वर्ष नवंबर से पूर्व प्रदेशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की जिम्मेदारी स्मार्ट चिप कंपनी के पास था। कंपनी से जुड़े रहे प्रतिनिधियों की मानें तो उस वक्त प्रतिकार्ड 27 रुपये मिलते थे, जबकि खर्च 45 से 50 रुपये आता था। लेकिन इस नुकसान को लेकर कई बार परिवहन मंत्री, आयुक्त आदि के समक्ष आवाज उठाई गई।
सीएम के हस्तक्षेप से खुलेगा भ्रष्टाचार
पीड़ित प्राइवेटकर्मियों की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय से वसूली, भ्रष्टाचार व लूट की शिकायतें की गई हैं। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप से डीएल एजेंसियों का भ्रष्टाचार उजागर होगा। इसके लिए एलआईयू जांच शुरू हो चुकी है।