फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   District Panchayat President Election: Breaking SP's Record Challenge for BJP

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव : सपा का रिकार्ड तोड़ना भाजपा के लिए चुनौती

Fri, 02 Jul 2021 07:25 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 02 Jul 2021 07:25 PM IST
सार

जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के सामने सपा का 2015 पंचायत चुनाव का रिकार्ड तोड़ने की चुनौती है। सपा ने 2015 में 63 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीता था वहीं भाजपा केवल तीन पर सिमट कर रह गई थी।

विज्ञापन
District Panchayat President Election: Breaking SP's Record Challenge for BJP
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के सामने सपा का 2015 पंचायत चुनाव का रिकार्ड तोड़ने की चुनौती है। सपा ने 2015 में 63 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीता था वहीं भाजपा केवल तीन पर सिमट कर रह गई थी। 2021 के पंचायत चुनाव में भाजपा ने 21 जिलों में अपने निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित कराने में सफलता हासिल की है। पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानने के कारण राजनीतिक पंडितों की निगाहें शनिवार को होने वाले चुनाव और उसके परिणाम पर टिकी है।

विज्ञापन


प्रदेश में डेढ़ दशक बाद पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई भाजपा ने करीब दो वर्ष तक पंचायत चुनाव की तैयारी की। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान पंचायत चुनाव होने के कारण जिला पंचायत सदस्य चुनाव में तो भाजपा को खास सफलता नहीं मिली। लेकिन पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उसकी भरपाई की रणनीति बनाई। पार्टी ने हालांकि घोषित तौर पर कोई लक्ष्य नहीं रखा है, लेकिन सरकार व संगठन की कोर कमेटी की बैठक में सपा के 63 सीटों के रिकार्ड को तोड़ने का मन बनाते हुए सरकार व संगठन जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में जुटे हैं।
विज्ञापन


पार्टी ने पुरजोर कोशिश के बाद वाराणसी, मऊ, गोरखपुर, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद और गाजियाबाद जैसे बड़े जिलों सहित कुल 21 जिलों में निर्विरोध जीत दर्ज करने में सफलता हासिल भी की है। वहीं सपा को एक मात्र इटावा में निर्विरोध जीत मिली है, यहां भी सपा उम्मीदवार को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का भी समर्थन था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पार्टी जुलाई के मध्य से विधानसभा चुनाव के मैदान में कूदने जा रही है, उससे पहले पार्टी गांवों की सरकार में अपना कब्जा जमाकर माहौल बनाना चाहती है। पार्टी ने सपा का रिकार्ड तोड़ने के लिए पूरी ताकत लगाई है। प्रभारी मंत्रियों के साथ पार्टी की ओर से नियुक्त प्रभारी पदाधिकारियों को जिलों में तैनात कर दिया है। प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के खेमे में शामिल सदस्यों को तोड़ने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। जहां कहीं विरोध के सुर उबर रहे हैं वहां सरकार और संगठन के स्तर से अंगुली टेढ़ी कर विरोध को दबाने का भी प्रयास किया जा रहा है।


भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह, महामंत्री संगठन सुनील बंसल और पंचायत चुनाव प्रभारी जेपीएस राठौर सहित अन्य पदाधिकारियों ने शुक्रवार को एक-एक जिले में फोन कर उम्मदीवारों और प्रभारियों से स्थिति का जायजा लिया। वहीं सरकार में भी मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सरकार के प्रमुख मंत्री इस काम में जुटे रहे। यदि भाजपा शनिवार को सपा का 63 सीटों का रिकार्ड तोड़ने में सफल होती है तो विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जनता के बीच बड़ा संदेश जाएगा। वहीं यदि सपा विपक्ष में होने के बाद भी भाजपा को रिकार्ड तोड़ने से रोकती है तो चुनाव परिणाम सपा के लिए संजीवनी बन जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed