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Lucknow News: जिला अस्पताल नहीं हो सका उच्कीकृत, वापस होंगे 4.88 करोड़
Mon, 20 Mar 2023 05:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 20 Mar 2023 05:39 PM IST
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अस्पताल प्रशासन नहीं करा पाया टेंडर, स्वास्थ्य सेवाएं जस की तस
बजट से ओटी को अपग्रेड करने के साथ अन्य उपकरणों की होनी थी खरीद
फोटो संख्या 16
संवाद न्यूज एजेंंसी
रायबरेली। जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने के लिए एक साल पहले मिले 4.88 करोड़ रुपये को अब वापस करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन टेंडर प्रक्रिया पूरी कराकर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर कर पाने में नाकाम रहा है। ऑपरेशन थिएटर को अपग्रेड करने के साथ ही बेड सहित अन्य चिकित्सीय उपकरणों की खरीद होनी थी, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलतीं। अस्पताल प्रशासन की सुस्ती के कारण मार्च में धन वापस हो जाएगा।
पिछले अप्रैल माह में जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने के लिए शासन से उक्त रुपये मिले थे। उस समय उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन तत्कालीन सीएमएस डॉ. नीता साहू की मनमानी के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी थी। जांच में गड़बड़झाला मिलने के बाद स्वास्थ्य महानिदेशक ने टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करके नए सिरे से प्रक्रिया शुरू कराने के आदेश दिए थे। करीब पांच महीने तक बजट खाते में डंप रहने के बाद अस्पताल प्रशासन से दोबारा आननफानन टेंडर प्रक्रिया शुरू की, लेकिन खामियां होने के कारण टेंडर निरस्त हो गया है।
वित्तीय वर्ष समाप्त होने वाला है, लेकिन टेंडर न हो पाने के कारण अस्पताल को उच्चीकृत करने का काम हो पाना संभव नहीं है। बजट को खर्च करने में नाकाम जिला अस्पताल प्रशासन अब रुपये शासन को वापस करने की प्रक्रिया में जुट गया है। नए वित्तीय वर्ष में दोबारा बजट मिलने के बाद ही अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का काम शुरू हो जाएगा।
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इनसेट
नहीं लगा 60 लाख का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट
इमरजेंसी कोविड रिस्पांस पैकेज (ईसीआरपी द्वितीय) के तहत जिला अस्पताल को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) प्लांट के लिए मिले 60 लाख रुपये भी खातों तक ही सिमटकर रह गया है। जिला अस्पताल प्रशासन इस बजट को भी खर्च कर पाने में नाकाम है। बजट मिलने के पांच माह बाद भी टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में यह बजट भी वापस होना तय हो गया है। सरकार से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए भले ही बजट मिलता है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण समय से बजट खर्च नहीं हो पा रहा है।
वर्जन
जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने के लिए 4.88 करोड़ रुपये मिले हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण खरीद नहीं हो सकी है। एलएमओ की स्थापना के लिए भी टेंडर प्रक्रिया को पूरी कराने का प्रयास किया जा रहा है, अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
-डॉ. महेद्र मौर्या, सीएमएस जिला अस्पताल
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बजट से ओटी को अपग्रेड करने के साथ अन्य उपकरणों की होनी थी खरीद
फोटो संख्या 16
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रायबरेली। जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने के लिए एक साल पहले मिले 4.88 करोड़ रुपये को अब वापस करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन टेंडर प्रक्रिया पूरी कराकर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर कर पाने में नाकाम रहा है। ऑपरेशन थिएटर को अपग्रेड करने के साथ ही बेड सहित अन्य चिकित्सीय उपकरणों की खरीद होनी थी, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलतीं। अस्पताल प्रशासन की सुस्ती के कारण मार्च में धन वापस हो जाएगा।
पिछले अप्रैल माह में जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने के लिए शासन से उक्त रुपये मिले थे। उस समय उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन तत्कालीन सीएमएस डॉ. नीता साहू की मनमानी के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी थी। जांच में गड़बड़झाला मिलने के बाद स्वास्थ्य महानिदेशक ने टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करके नए सिरे से प्रक्रिया शुरू कराने के आदेश दिए थे। करीब पांच महीने तक बजट खाते में डंप रहने के बाद अस्पताल प्रशासन से दोबारा आननफानन टेंडर प्रक्रिया शुरू की, लेकिन खामियां होने के कारण टेंडर निरस्त हो गया है।
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वित्तीय वर्ष समाप्त होने वाला है, लेकिन टेंडर न हो पाने के कारण अस्पताल को उच्चीकृत करने का काम हो पाना संभव नहीं है। बजट को खर्च करने में नाकाम जिला अस्पताल प्रशासन अब रुपये शासन को वापस करने की प्रक्रिया में जुट गया है। नए वित्तीय वर्ष में दोबारा बजट मिलने के बाद ही अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का काम शुरू हो जाएगा।
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इनसेट
नहीं लगा 60 लाख का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट
इमरजेंसी कोविड रिस्पांस पैकेज (ईसीआरपी द्वितीय) के तहत जिला अस्पताल को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) प्लांट के लिए मिले 60 लाख रुपये भी खातों तक ही सिमटकर रह गया है। जिला अस्पताल प्रशासन इस बजट को भी खर्च कर पाने में नाकाम है। बजट मिलने के पांच माह बाद भी टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में यह बजट भी वापस होना तय हो गया है। सरकार से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए भले ही बजट मिलता है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण समय से बजट खर्च नहीं हो पा रहा है।
वर्जन
जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने के लिए 4.88 करोड़ रुपये मिले हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण खरीद नहीं हो सकी है। एलएमओ की स्थापना के लिए भी टेंडर प्रक्रिया को पूरी कराने का प्रयास किया जा रहा है, अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
-डॉ. महेद्र मौर्या, सीएमएस जिला अस्पताल