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रंग लाया सयानी अम्मा का प्रयास, अब किसी बच्चे को आधा पेट नहीं खिलाती मां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 17 Sep 2018 02:43 PM IST
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सयानी अम्मा सरला
- फोटो : amar ujala
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सीतापुर के पिसावां ब्लॉक का गांव है तेनी। सालभर पहले तक यहां बच्चों को मांएं रात को भरपेट खाना खिलाने से बचती थीं। दरअसल उन्हें डर था कि यदि भरपेट खिला दिया और रात को बच्चा शौच जाने को कहेगा तो कैसे अंधेरे में लेकर जाएंगी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
अब मां को यह नहीं सोचना पड़ता कि रात को बच्चे को कहां ले जाएंगे। यह संभव हुआ सयानी अम्मा सरला के कारण। कक्षा आठ पास सयानी अम्मा कहती है कि हमें जब स्वच्छ भारत अभियान के बारे में पता चला तो हम भी गांव के भले का सोचकर इससे जुड़ गए।
सरला देवी के प्रयासों से गांव में 108 शौचालय बन चुके हैं। इसके लिए जिला प्रशासन ने उन्हें सम्मानित भी किया। कहती हैं कि एक दिन मोदी जी भी हमारा गांव देखने आएंगे।
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माला और हम सीटी लेकर निकलते थे। जो खुले में शौच करता मिलता उसका सम्मान करते, हार पहनाते और निवदेन करते कि दोबारा ऐसा न करें। दिक्कत लोगों के पास पैसे और सोच दोनों की थी। लोगों को लगता था कि शौचालय बनवाना यानी फालतू पैसा खर्चा करना होता है। लोग नहीं माने , उलटे मार पिटाई पर उतारू हो गए - सरला देवी
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अब मां को यह नहीं सोचना पड़ता कि रात को बच्चे को कहां ले जाएंगे। यह संभव हुआ सयानी अम्मा सरला के कारण। कक्षा आठ पास सयानी अम्मा कहती है कि हमें जब स्वच्छ भारत अभियान के बारे में पता चला तो हम भी गांव के भले का सोचकर इससे जुड़ गए।
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सरला देवी के प्रयासों से गांव में 108 शौचालय बन चुके हैं। इसके लिए जिला प्रशासन ने उन्हें सम्मानित भी किया। कहती हैं कि एक दिन मोदी जी भी हमारा गांव देखने आएंगे।
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माला और हम सीटी लेकर निकलते थे। जो खुले में शौच करता मिलता उसका सम्मान करते, हार पहनाते और निवदेन करते कि दोबारा ऐसा न करें। दिक्कत लोगों के पास पैसे और सोच दोनों की थी। लोगों को लगता था कि शौचालय बनवाना यानी फालतू पैसा खर्चा करना होता है। लोग नहीं माने , उलटे मार पिटाई पर उतारू हो गए - सरला देवी