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वक्फ संपत्तियों के विवादों का नहीं हो पाएगा निपटारा
Tue, 06 Oct 2020 10:46 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 06 Oct 2020 10:46 PM IST
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वक्फ बोर्ड - यूपी
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के विवादों का निपटारा अब नहीं हो पाएगा। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिला छह महीने का कार्यकाल विस्तार 30 सितंबर को खत्म हो गया है। ऐसे में विवादों के निपटारे के लिए बोर्ड के बिना सुनवाई नहीं हो सकेगी। वहीं, वक्फ संपत्तियों के नए मुतवल्लियों की तैनाती भी नहीं हो सकेगी। हालांकि बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एसएम शुऐब ने बोर्ड के गठन के लिए चुनाव कराने या कार्य विस्तार करने के लिए शासन को पत्र लिखा है।
गौरतलब है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का कार्यकाल 31 मार्च और शिया वक्फ बोर्ड का कार्यकाल 18 मई को खत्म हो गया था। राज्य सरकार ने कोरोना के चलते लॉकडाउन का हवाला देते हुए कहा था कि चुनाव संभव नहीं है, लिहाजा दोनों बोर्ड में सीईओ के जरिये काम कराया जाएगा। मगर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को छह महीने का कार्यकाल विस्तार दे दिया।
चर्चा थी कि सरकार ने अयोध्या मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के कदम से खुश होकर चेयरमैन जुफर फारूकी को तोहफा दिया है। मगर यह अवधि भी 30 सितंबर को खत्म हो गई। ऐसे में बोर्ड की जिम्मेदारी सीईओ के पास आ गई है। उधर, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने भी बोर्ड के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए सरकार को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया। लिहाजा उसका कामकाज सीईओ ही देख रहे हैं। इस तरह दोनों बोर्ड के कामकाज की जिम्मेदारी अब सीईओ के पास आ गई है।
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वक्फ संपत्तियों के विवादों के निपटारे के लिए वक्फ एक्ट के सेक्शन 64 और 67 के तहत सुनवाई बोर्ड के सदस्यों की मौजूदगी में चैयरमैन करता है। सीईओ को इसका अधिकार नहीं है। सीईओ सिर्फ संपत्तियों पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ ही कार्यवाही कर सकता है।
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गौरतलब है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का कार्यकाल 31 मार्च और शिया वक्फ बोर्ड का कार्यकाल 18 मई को खत्म हो गया था। राज्य सरकार ने कोरोना के चलते लॉकडाउन का हवाला देते हुए कहा था कि चुनाव संभव नहीं है, लिहाजा दोनों बोर्ड में सीईओ के जरिये काम कराया जाएगा। मगर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को छह महीने का कार्यकाल विस्तार दे दिया।
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चर्चा थी कि सरकार ने अयोध्या मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के कदम से खुश होकर चेयरमैन जुफर फारूकी को तोहफा दिया है। मगर यह अवधि भी 30 सितंबर को खत्म हो गई। ऐसे में बोर्ड की जिम्मेदारी सीईओ के पास आ गई है। उधर, शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने भी बोर्ड के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए सरकार को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया। लिहाजा उसका कामकाज सीईओ ही देख रहे हैं। इस तरह दोनों बोर्ड के कामकाज की जिम्मेदारी अब सीईओ के पास आ गई है।
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वक्फ संपत्तियों के विवादों के निपटारे के लिए वक्फ एक्ट के सेक्शन 64 और 67 के तहत सुनवाई बोर्ड के सदस्यों की मौजूदगी में चैयरमैन करता है। सीईओ को इसका अधिकार नहीं है। सीईओ सिर्फ संपत्तियों पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ ही कार्यवाही कर सकता है।