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Lucknow News: महापौर-नगर आयुक्त में विवाद लगा सकता है विकास में अडंगा

Fri, 31 Oct 2025 02:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Oct 2025 02:48 AM IST
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Dispute between Mayor and Municipal Commissioner may hinder development
लखनऊ। महापौर सुषमा खर्कवाल व नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच तनातनी का शहर के विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। पिछले 25 वर्ष में पहली बार ऐसा हुआ है जब नगर निगम के दो मुखिया इस तरह से आमने- सामने हैं। विवाद बढ़ा तो अगले महीने आने वाला नगर निगम का पुनरीक्षित बजट भी अटक जाएगा। इसका असर शहर में सफाई, सड़कों की मरम्मत, मार्ग प्रकाश सहित अन्य कार्यों पर पड़ेगा।
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नगर निगम का मूल बजट 31 मार्च से पहले पास किया जाता है, जो एक अप्रैल से लागू होता है। मंजूर किए बजट से अधिक नया पास होने से पहले खर्च हो जाए या ऐसा होने का अनुमान होता है तो अक्तूबर में पुनरीक्षित बजट लाया जाता है। नगर निगम अधिनियम के प्रावधान के तहत पुनरीक्षित बजट अक्तूबर के पहले सप्ताह में पास हो जाना चाहिए, पर अब तक ऐसा नहीं हो सका। इसके लिए कार्यकारिणी बैठक बुलाई जाती है। इसमें बजट मंजूर होने के बाद उसे सदन में पास किया जाता है। अब विवाद से लग रहा है कि बजट दिसंबर तक पास नहीं हो पाएगा। इससे नगर निगम के कामकाज व विकास कार्यों पर असर पड़ेगा।
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100 करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत
तैयार किए जा रहे पुनरीक्षित बजट के हिसाब से 100 करोड़ रुपये से अधिक का बजट नगर निगम को सफाई, मार्ग प्रकाश और सड़क निर्माण आदि के लिए बढ़ाना पड़ेगा। नई सड़क बनाने के लिए दो करोड़, पार्कों के रखरखाव के लिए 23 करोड़, सड़कों की मरम्मत के लिए करीब 45 करोड़, नाले बनाने के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट बढ़ाने की जरूरत है। कई और मदों में बजट बढ़ाने की जरूरत है।
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विकास कार्यों पर नहीं होगा असर : महापौर
महापौर सुषमा खर्कवाल का कहना है कि सड़कों के गड्ढे भरने के लिए डेढ़ वर्ष पहले मशीन खरीदी गई थी। उससे भरे गड्ढे ज्यादा मजबूत होते हैं, लेकिन अब इसका इस्तेमाल नहीं होता। उनका यह भी कहना है कि शहर के विकास कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। अफसर मनमानी करेंगे तो कार्यकारिणी बैठक में बजट को पास किया जाएगा। पैचवर्क के लिए एक सप्ताह में 15 करोड़ रुपये का बजट पास कर दिया जाएगा। कार्यकारिणी और सदन पास करता है बजट: नगर आयुक्त


नगर आयुक्त गौरव कुमार का कहना है कि बजट नगर निगम कार्यकारिणी व सदन पास करता है। फिर प्रशासन इसे लागू करता है। कई कार्यों में दिक्कत इसलिए आ रही है, क्योंकि पिछली नगर निगम सदन की कार्यवाही को अभी तक अनुमोदित कर जारी नहीं किया गया है। इससे सदन में पास हुए प्रस्तावों पर अमल नहीं हो पा रहा है।
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