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खुलासा:यूपी में बिजली गिरने से मरने वालों में 80 फीसदी लोग पूर्वांचल-बुंदेलखंड के, इन जिलों में एक भी मौत नहीं

Tue, 02 Sep 2025 06:33 AM IST
रोहित मिश्र अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 02 Sep 2025 06:33 AM IST
सार

Lightning in UP: यूपी में हर साल आकाशीय बिजली गिरने से मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ ऐसे जिले हैं जहां प्रभावितों की संख्या लगातार बढ़ी है। 

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Disclosure: 80% of the people who died due to lightning in UP are from Purvanchal-Bundelkhand, not a single de
वज्रपात - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

उत्तर प्रदेश में साल दर साल बिजली गिरने से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ रही है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड में यह बिजली ज्यादा कहर ढहा रही है। विगत चार साल के आंकड़े बताते हैं कि सोनभद्र, ललितपुर, झांसी, बांदा चंदौली, प्रतापगढ़, चित्रकूट, फतेहपुर, गाजीपुर, बलिया व प्रयागराज में बिजली गिरने से अधिक मौतें हुई हैं। वहीं, इन वर्षों में हापुड़, मुजफ्फरनगर और रामपुर में मौत का एक भी मामला सामने नहीं आया।

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बिजली गिरना वह प्राकृतिक घटना है, जिसमें गरज वाले बादलों के बीच या बादल और जमीन के बीच उच्च विद्युत आवेशों का तेजी से संचरण होता है। बादलों में जल और बर्फ के कणों के आपस में घर्षण से आवेश उत्पन्न होते हैं, जो बिजली के रूप में जमीन की ओर बढ़ता है। इसे ही हम बिजली गिरना कहते हैं। यह घटना इंसानों, पशुओं और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाती है। मानसून सीजन में ये घटनाएं ज्यादा होती हैं।
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लोगों के मरने की 80 फीसदी घटनाएं पूर्वांचल और बुंदेलखंड में
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024-25 में बिजली गिरने से प्रदेश में 373 लोगों की मौत हुई। इसमें पूर्वी यूपी में 217 और बुंदेलखंड में 82 लोग मरे। यानी, इन दो क्षेत्रों में कुल 299 मौतें हुईं। पश्चिमी यूपी में 47 और मध्य यूपी में 27 मौतें हुईं। इस तरह से देखें तो 80 फीसदी मृतक पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र में हैं।

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समस्या की जड़ में अंधाधुंध खनन और जंगल कटान

लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिक शास्त्री प्रो. एनके पांडेय पूर्वांचल और बुंदेलखंड में ज्यादा घटनाएं होने के पीछे की वजह अंधाधुंध खनन और जंगल कटान बताते हैं। वे बताते हैं कि खनन और जंगल कटान से हीट (तापमान) बढ़ता है। स्थानीय हीट, बंगाल की खाड़ी से आने वाली गरम हवाएं और प्रदूषण के कण मिलकर छोटे-छोटे बादल (क्लाउड) बनाती हैं। इन क्षेत्रों में नदियां भी हैं, जिससे पर्याप्त नमी भी मिल रहती है, जो छोटे बादल बनाने में सहायक होती है। जब यह बादल आपस में टकराते हैं तो इनसे बनने वाला विद्युत चार्ज इंसानों और पेड़ों की मौत का कारण बनते हैं। हालांकि, प्रो. पांडेय मानते हैं कि पूर्वांचल और बुंदेलखंड में ज्यादा मौतों के सभी सटीक कारण जानने के लिए गहन अध्ययन और शोध की आवश्यकता है।

यूपी में किस वर्ष कितने लोग बिजली गिरने से मरे

2021-22             273
2022-23             301
2023-24             322
2024-25             373

वर्षवार टॉप-5 जिले जहां सबसे ज्यादा लोग मरे (मृतकों की संख्या)

2021-22 : सोनभद्र (37), प्रयागराज (31), मिर्जापुर (22), ललितपुर (16), गाजीपुर व झांसी (दोनों जिले में 11-11)।
2022-23 : सोनभद्र (29), मिर्जापुर (25), बांदा (24), प्रयागराज (22), ललितपुर (19)।
2023-24 : सोनभद्र (26), गाजीपुर (25), मिर्जापुर (23), बलिया (18), प्रयागराज (15)
2024-25 : ललितपुर (21), चंदौली (20), प्रतापगढ़ (19), चित्रकूट-फतेहपुर-गाजीपुर (प्रत्येक में 18 की मौत), प्रयागराज (17)
 

वर्ष 2024-25 में बिजली से यूपी के किस क्षेत्र में कितने लोग मरे

पूर्वी यूपी : 217
बुंदेलखंड : 82
पश्चिमी यूपी : 47
मध्य यूपी : 27
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