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34 साल पुराने मामले में निदेशक दूरसंचार को 3 साल जेल की सजा
Fri, 19 Feb 2021 11:14 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 19 Feb 2021 11:14 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
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जाली टेंडर के जरिये अधिक रेट पर काम का आवंटन करके 44 लाख रुपये का घोटाला करने के 34 साल पुराने मामले में बरेली में दूरसंचार विभाग के निदेशक उत्तर क्षेत्र डीपी श्रीवास्तव को तीन साल के कारावास और 70 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। वहीं, इसी मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश कुमार मयंक ने मेसर्स ग्रैंड टिंबर इंडस्ट्रीज, पहाड़गंज दिल्ली के साझेदार प्रदीप गोधवानी को तीन साल के कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
गौरतलब है कि सीबीआई ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने कोर्ट में आरोप लगाया गया कि डीपी श्रीवास्तव ने दूरसंचार के निदेशक उत्तर क्षेत्र बरेली के पद पर तैनाती के दौरान वर्ष 1987 में ग्रैंड टिंबर के साझीदार प्रदीप गोधवानी के साथ मिलकर षड्यंत्र किया। श्रीवास्तव ने गोधवानी की फर्म को जाली टेंडर मेमो के आधार पर खरीद के दो ऑर्डर दिए थे। इससे विभाग को लगभग 44,43,945 रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने मामले की विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश की अदालत में आरोप पत्र दायर किया था।
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गौरतलब है कि सीबीआई ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने कोर्ट में आरोप लगाया गया कि डीपी श्रीवास्तव ने दूरसंचार के निदेशक उत्तर क्षेत्र बरेली के पद पर तैनाती के दौरान वर्ष 1987 में ग्रैंड टिंबर के साझीदार प्रदीप गोधवानी के साथ मिलकर षड्यंत्र किया। श्रीवास्तव ने गोधवानी की फर्म को जाली टेंडर मेमो के आधार पर खरीद के दो ऑर्डर दिए थे। इससे विभाग को लगभग 44,43,945 रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने मामले की विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश की अदालत में आरोप पत्र दायर किया था।
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