सीता को टेस्ट ट्यूब बताने पर डिप्टी सीएम ने पेश की सफाई, भाजपा ने किया किनारा
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सीता को टेस्ट ट्यूब बेबी बताना प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को महंगा पड़ गया है। सोशल मीडिया में बयान वायरल होते ही हर तरफ से उनका विरोध शुरू हो गया है।
विवाद बढ़ता देख शुक्रवार को शर्मा ने लंबी-चौड़ी सफाई पेश करते हुए मामला संभालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और माता सीता हमारे आराध्य हैं। हमारे लिए राम व सीता जितने पूजनीय हैं। उतना दूसरा कोई नहीं। सुबह उठता हूं तो सीताराम कहकर उठता हूं। रात को सोता हूं तो सीताराम कहकर सोता हूं। मेरे जैसे व्यक्ति के मुंह से विवादित शब्द नहीं निकल सकता।
आगे अपने बयान पर सफाई पेश करते हुए बोले कि कार्यक्रम में एक तकनीकी ज्ञान के लिए बोल रहा था। कहा था कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि उस समय भी ऐसी टेक्नोलॉजी मौजूद हो। कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थियों का होने के कारण उसमें मैंने दो उदाहरण देते हुए कहा था कि यह शोध का विषय है कि उस समय कैसा तंत्र विकसित रहा होगा। मैं विवाद से बहुत दूर रहता हूं, कुछ लोग विवाद खड़ा करना चाहते हैं।
वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र यादव ने डॉ. शर्मा के बयान से पल्ला झाड़ते हुए उसे उनकी निजी राय बताया, साथ ही उन्हें बातचीत में संयम बरतने की नसीहत भी दे डाली।
बताते चलें कि बृहस्पतिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कौशल विकास क्षेत्रीय प्रतियोगिता में अपने उद्बोधन में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा था कि ‘सीता जी का जन्म घड़े से हुआ तो उस समय टेस्ट ट्यूब बेबी का कोई ना कोई प्रोजेक्ट रहा होगा। जनक जी ने हल चलाया तो घड़े से बेबी निकली, वह सीता बन गई। यह कोई ना कोई टेक्नोलॉजी थी जो आज टेस्ट ट्यूब बेबी है, वैसी कोई टेक्नोलॉजी रही होगी।’
यही नहीं महाभारत का उदाहरण देते हुए दिनेश शर्मा ने कहा था कि महाभारत के युद्ध के दौरान संजय ने धृतराष्ट्र को महल में बैठे बैठे युद्ध का सीधा प्रसारण सुनाया था। वह आज टीवी पर होने वाला लाइव टेलीकास्ट नहीं तो और क्या है।
नारद मुनि की तुलना गुगल से
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने नारद मुनि की तुलना गूगल से करते हुए कहा था कि आज जिस तरह गूगल को तमाम विषय के जानकार के रूप में माना जाता है, पौराणिक काल में भी एक विशेष चरित्र हुआ करते थे नारद मुनि। जो कहीं भी, कभी भी पहुंचकर हर जिज्ञासा को शांत कर देते थे। समस्या का निदान भी सुझाते थे। वे तीन बार नारायण नारायण बोलकर ही कोई भी संदेश कहीं से कहीें पहुंचा देते थे। डॉ. शर्मा का बयान सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विरोध शुरू हो गया। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प सहित न्यूज चैनलों पर भी डॉ. शर्मा के बयान को लेकर बहस शुरू हो गई।