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Lucknow News: बोर्ड पर सूचना तक सीमित डिजिटल भुगतान
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कैश के लिए परेशान लोग और काउंटर पर लगा बोर्ड।
लखनऊ। तमाम दावों के बावजूद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में मरीज और तीमादारों को डिजिटल भुगतान की सुविधा नहीं मिल पा रही है। संस्थान के हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के स्टोर पर ऑनलाइन भुगतान का बोर्ड लगा होने के बावजूद इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है।
केस 1- झांसी निवासी अनिरुद्ध पेट की समस्या पर केजीएमयू की ओपीडी में दिखाने पहुंचे। एचआरएफ स्टोर पर दवाएं लेने के बाद उन्होंने डिजिटल भुगतान करना चाहा, पर इसकी सुविधा नहीं मिली। एटीएम से पैसे निकालने में उनका काफी समय बर्बाद हुआ।
केस 2-लखनऊ निवासी संजीव यादव मेडिसिन विभाग में दिखाने आए थे। एचआरएफ स्टोर पर 60 फीसदी तक कम कीमत पर दवाएं मिलती हैं। संजीव इसकी कतार में लगे, लेकिन ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने से उन्हें साथी से रुपये लेने के लिए लाइन से बाहर आना पड़ा।
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केस 3- बिहार से हिमेटोलॉजी विभाग में दिखाने आईं सोनाली गिरि सोमवार को स्टोर से दवाएं लेने के लिए करीब एक घंटे तक परेशान रहीं। उनके पास नकद रुपये नहीं थे। उन्होंने ऑनलाइन भुगतान के बारे में जानकारी भी की, लेकिन संचालक ने मना कर दिया। एक घंटे की जद्दोजहद के बाद उनसे एक मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन भुगतान लिया गया।
सरकार जहां डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रही है, वहीं केजीएमयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में लापरवाही बरती जा रही है। मरीजों को परचा बनवाने, जांच शुल्क जमा करने और अन्य सेवाओं के लिए नकदी का ही सहारा लेना पड़ रहा है। कई बार दूरदराज से आए मरीजों के पास पर्याप्त नकदी नहीं होती, जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
डिजिटल भुगतान की सुविधा न होने से मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। कई बार उन्हें एटीएम या बैंक ढूंढ़ने के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। इससे उनका काफी समय बर्बाद होता है और इलाज में भी देरी होती है। ऐसे में विशेषकर बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति और कठिन हो जाती है। यह व्यवस्था मरीजों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है।
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक, एचआरएफ स्टोर पर डिजिटल भुगतान की सुविधा दी गई है, लेकिन क्यूआर कोड से कई बार भुगतान फंसने की समस्या होने से स्टोर वाले नकद भुगतान को वरीयता देते हैं। उन्हें ऑनलाइन भुगतान लेने का निर्देश दिया जाएगा।
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केस 1- झांसी निवासी अनिरुद्ध पेट की समस्या पर केजीएमयू की ओपीडी में दिखाने पहुंचे। एचआरएफ स्टोर पर दवाएं लेने के बाद उन्होंने डिजिटल भुगतान करना चाहा, पर इसकी सुविधा नहीं मिली। एटीएम से पैसे निकालने में उनका काफी समय बर्बाद हुआ।
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केस 2-लखनऊ निवासी संजीव यादव मेडिसिन विभाग में दिखाने आए थे। एचआरएफ स्टोर पर 60 फीसदी तक कम कीमत पर दवाएं मिलती हैं। संजीव इसकी कतार में लगे, लेकिन ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने से उन्हें साथी से रुपये लेने के लिए लाइन से बाहर आना पड़ा।
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केस 3- बिहार से हिमेटोलॉजी विभाग में दिखाने आईं सोनाली गिरि सोमवार को स्टोर से दवाएं लेने के लिए करीब एक घंटे तक परेशान रहीं। उनके पास नकद रुपये नहीं थे। उन्होंने ऑनलाइन भुगतान के बारे में जानकारी भी की, लेकिन संचालक ने मना कर दिया। एक घंटे की जद्दोजहद के बाद उनसे एक मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन भुगतान लिया गया।
सरकार जहां डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रही है, वहीं केजीएमयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में लापरवाही बरती जा रही है। मरीजों को परचा बनवाने, जांच शुल्क जमा करने और अन्य सेवाओं के लिए नकदी का ही सहारा लेना पड़ रहा है। कई बार दूरदराज से आए मरीजों के पास पर्याप्त नकदी नहीं होती, जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
डिजिटल भुगतान की सुविधा न होने से मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। कई बार उन्हें एटीएम या बैंक ढूंढ़ने के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। इससे उनका काफी समय बर्बाद होता है और इलाज में भी देरी होती है। ऐसे में विशेषकर बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति और कठिन हो जाती है। यह व्यवस्था मरीजों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है।
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक, एचआरएफ स्टोर पर डिजिटल भुगतान की सुविधा दी गई है, लेकिन क्यूआर कोड से कई बार भुगतान फंसने की समस्या होने से स्टोर वाले नकद भुगतान को वरीयता देते हैं। उन्हें ऑनलाइन भुगतान लेने का निर्देश दिया जाएगा।

कैश के लिए परेशान लोग और काउंटर पर लगा बोर्ड।

कैश के लिए परेशान लोग और काउंटर पर लगा बोर्ड।

कैश के लिए परेशान लोग और काउंटर पर लगा बोर्ड।