अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इस तरह आयी प्रतिक्रियाएं
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सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं बताने वाले 1994 के फैसले को फिर से विचार के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा फैसले और 29 अक्तूबर से सुनवाई शुरू करने के निर्णय से अब जल्द फैसला आने की उम्मीद जगी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षकारों ने अपने-अपने तरीके से सही ठहराते हुए स्वागत किया है। पक्षकारों का कहना है कि अब अयोध्या मामले में बिना विलंब किए सुनवाई और फैसला आना चाहिए, ताकि सालों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो। अब इस मामले में कोई रोड़ा न अटकाए। वहीं इस फैसले को लेकर बृहस्पतिवार को रामनगरी में पूरे दिन गहमागहमी रही।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर रामनगरी में पूरे दिन गहमा-गहमी रही। हर कोई सुप्रीम कोर्ट से आने वाले एक महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर उत्सुक रहा। हालांकि अयोध्या आम दिनों की तरह ही अपने रौ में रही।
मठ-मंदिरों में गूंज रही रामधुन अयोध्या की धार्मिकता बयां कर रही थी। संत भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार करते रहे। आम आदमी तो पूरी तरह से इस मामले को लेकर बेफिक्र रहा और अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में संलिप्त रहा।
रोड़ा अटकाने वालों को लगा झटका : महंत धर्मदास
हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। कहा, राममंदिर मामले में रोड़ा अटका रहे लोगों को बड़ा झटका लगा है। हमें उम्मीद है कि रामजन्मभूमि का फैसला अब जल्द ही आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है वह राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने वाला है, अब वह दिन दूरी नहीं जब अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण शुरू होगा।
रामलला पर विश्वास हुआ प्रबल : दिनेंद्र दास
निर्मोही अखाड़ा की तरफ से अयोध्या मामले का मुकदमा लड़ रहे महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि रामलला पर विश्वास प्रबल हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सराहनीय है। राममंदिर निर्माण की बाधाएं अब दूर हो रही हैं। रामलला स्वयं चाहते हैं कि मंदिर निर्माण हो। अब अयोध्या में भव्य श्रीराममंदिर का निर्माण कोई नहीं रोक सकता। रामलला जल्द ही टेंट से आजाद होंगे।
सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला दे यह सभी चाहते : इकबाल अंसारी
मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। नमाज मस्जिद में पढ़ी जाए या बाहर नमाज तो नमाज ही है। कोर्ट अयोध्या मामले में जल्द फैसला दे यह सभी चाहते हैं। कोर्ट ने आज जो फैसला दिया है हमें कोई एतराज नहीं। कम से कम एक फैसला तो आया। कहा कि फैसला किसी के हक में आए दोनों पक्षों को मानना होगा।
मस्जिद खुदा का घर : हाजी महबूब
बाबरी मस्जिद मामले के पैरोकार हाजी महबूब ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कहा कि मस्जिद खुदा का घर है। हमें वहां पर नमाज पढ़ने का अधिकार है। इस मामले में बड़ी बेंच को सुनवाई करनी चाहिए थी, फिलहाल कोर्ट ने जो फैसला दिया उस पर कुछ नहीं कहना चाहते। इस निर्णय से अयोध्या मामले की सुनवाई में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।