सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा में PFI और रिहाई मंच का सक्रिय योगदान: यूपी डीजीपी
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई हिंसा में पीएफआई (पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के साथ ही रिहाई मंच की भी सक्रिय भूमिका रही। डीजीपी ओपी सिंह ने शुक्रवार को कहा कि पीएफआई व रिहाई मंच के खिलाफ अग्रिम कार्रवाई के लिए गृह विभाग को पत्र भेजा गया था। गृह विभाग ने इसे केंद्र सरकार को भेज दिया है।
नोएडा के एसएसपी व अन्य आईपीएस अफसरों के विवाद के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखने के लिए बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में पीएफआई को लेकर सवाल पर डीजीपी ने कहा कि विरोध करने वालों को लामबंद (मोबिलाइज) करने में संस्था ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास इसके पर्याप्त प्रमाण हैं। पुलिस ने हिंसा के मामले में पीएफआई से जुड़े 25 लोगों को गिरफ्तार किया।
रिहाई मंच के सदस्यों को किया गया गिरफ्तार
यह पूछे जाने पर कि क्या हिंसा को लेकर किसी एनजीओ के पॉलिटिकल लिंक सामने आ रहे हैं? उन्होंने कहा कि रिहाई मंच के भी कुछ सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की गहन जांच हो रही है। गृह विभाग द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए आग्रह पर सहमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि प्रदेश में हाल के दिनों में हुई हिंसा के दौरान पीएफआई के जो सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़े उनमें लखनऊ और शामली के सबसे अधिक थे। लखनऊ में पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद समेत अन्य को गिरफ्तार किया गया था। संगठन यूपी के अलावा 11 अन्य राज्यों में सक्रिय है।