{"_id":"58f45ee34f1c1b38744710d8","slug":"despite-the-refusal-of-mulayam-samajwadi-party-will-go-ahead-on-the-alliance","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महागठबंधन पर अखिलेश की हां, मुलायम की ना अब आगे क्या?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महागठबंधन पर अखिलेश की हां, मुलायम की ना अब आगे क्या?
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Updated Mon, 17 Apr 2017 03:04 PM IST
विज्ञापन
मुलायम सिंह यादव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुलायम के इनकार के बावजूद समाजवादी पार्टी गठबंधन पर आगे बढ़ेगी। अखिलेश और मायावती के सकारात्मक रुख के बाद यूपी में सपा-बसपा के नजदीक आने के रास्ते खुल गए हैं। गठबंधन के मुद्दे पर अखिलेश की कई नेताओं से मुलाकात चुकी है। जदयू भी इस दिशा में सक्रिय हो गया है। कोशिश है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन शक्ल अख्तियार कर ले।
विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा दोनों को करारा झटका लगा। दोनों दलों की सत्ता में आने की उम्मीदें तो धूमिल हुई हीं उन्हें सीटें बहुत कम मिली। पहली बार भाजपा को तीन चौथाई सीटें हासिल र्हुई। चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया था। मुलायम सिंह यादव इस गठबंधन के खिलाफ थे।
उनकी राय की अनदेखी कर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस से गठबंधन किया। कांग्रेस के लिए 100 से ज्यादा सीटें छोड़ीं और राहुल गांधी के साथ प्रेस कांफ्रेंस, रोड शो व रैलियां की। हालांकि यह गठबंधन हिट नहीं हो सका। सपा को 47 और कांग्रेस 7 सीटें ही मिलीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा दोनों को करारा झटका लगा। दोनों दलों की सत्ता में आने की उम्मीदें तो धूमिल हुई हीं उन्हें सीटें बहुत कम मिली। पहली बार भाजपा को तीन चौथाई सीटें हासिल र्हुई। चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया था। मुलायम सिंह यादव इस गठबंधन के खिलाफ थे।
विज्ञापन
उनकी राय की अनदेखी कर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस से गठबंधन किया। कांग्रेस के लिए 100 से ज्यादा सीटें छोड़ीं और राहुल गांधी के साथ प्रेस कांफ्रेंस, रोड शो व रैलियां की। हालांकि यह गठबंधन हिट नहीं हो सका। सपा को 47 और कांग्रेस 7 सीटें ही मिलीं।
विज्ञापन
भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने के पक्ष में हैं अखिलेश
लखनऊ अखिलेश ने ईवीएम पर उठाए सवाल
- फोटो : SELF
चुनाव में हार के बाद अखिलेश यादव अब भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनाने के पक्षधर हैं। चुनाव परिणाम आने से पहले ही उन्होंने भाजपा को रोकने के लिए गठबंधन का विकल्प खुला रखा था। हालांकि भाजपा की इकतरफा जीत के चलते इसकी जरूरत ही नहीं पड़ी। चुनाव के पहले ‘एकला चलो’ की नीति अपनाने वाली मायावती भी अब गठबंधन के लिए तैयार हैं।
अंबेडकर जयंती पर उन्होंने इसकी घोषणा भी कर दी। इसके अगले ही दिन अखिलेश ने उनके प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए भाजपा के खिलाफ गठबंधन की पैरोकारी की। अभी भी मुलायम सिंह गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं। शनिवार को उन्होंने इटावा और रविवार को करहल (मैनपुरी) में अखिलेश से जुदा राय जाहिर की। कहा कि गठबंधन की कोई जरूरत नहीं है। सपा अकेले चुनाव लड़ने और भाजपा का मुकाबला करने में सक्षम है।
अखिलेश कर चुके हैं पहल
सपा सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव गठबंधन की पहल कर चुके हैं। दिल्ली में वह दूसरे दलों के कई वरिष्ठ नेताओं से मिल चुके हैं। उनकी तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और जनता दल यू के नेताओं से बात हुई है। खुद अखिलेश ने इसे स्वीकार किया है। जदयू चुनाव से पहले भी महागठबंधन का पक्षधर था लेकिन तब उसकी बात किसी ने नहीं सुनी थी। वहीं सपा और बसपा के सकारात्मक रुख का जद यू के प्रमुख महासचिव केसी त्यागी ने स्वागत किया है। जद यू नेता वामपंथी दलों व कांग्रेस से बात कर चुके हैं। कोशिश की जा रही है कि गठबंधन का दायरा बढ़ाया जाए।
अंबेडकर जयंती पर उन्होंने इसकी घोषणा भी कर दी। इसके अगले ही दिन अखिलेश ने उनके प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए भाजपा के खिलाफ गठबंधन की पैरोकारी की। अभी भी मुलायम सिंह गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं। शनिवार को उन्होंने इटावा और रविवार को करहल (मैनपुरी) में अखिलेश से जुदा राय जाहिर की। कहा कि गठबंधन की कोई जरूरत नहीं है। सपा अकेले चुनाव लड़ने और भाजपा का मुकाबला करने में सक्षम है।
अखिलेश कर चुके हैं पहल
सपा सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव गठबंधन की पहल कर चुके हैं। दिल्ली में वह दूसरे दलों के कई वरिष्ठ नेताओं से मिल चुके हैं। उनकी तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और जनता दल यू के नेताओं से बात हुई है। खुद अखिलेश ने इसे स्वीकार किया है। जदयू चुनाव से पहले भी महागठबंधन का पक्षधर था लेकिन तब उसकी बात किसी ने नहीं सुनी थी। वहीं सपा और बसपा के सकारात्मक रुख का जद यू के प्रमुख महासचिव केसी त्यागी ने स्वागत किया है। जद यू नेता वामपंथी दलों व कांग्रेस से बात कर चुके हैं। कोशिश की जा रही है कि गठबंधन का दायरा बढ़ाया जाए।