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किसान महापंचायत: उप मुख्यमंत्री बोले- बहकावे में न आएं किसान, सरकार उनके लिए काम कर रही है
Sun, 05 Sep 2021 04:46 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 05 Sep 2021 04:46 PM IST
सार
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि किसानों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए जो दल उनके समर्थन का दावा कर रहे हैं वो जब सत्ता में थे तो किसानों के लिए कुछ नहीं किया।
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उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुजफ्फरनगर में रविवार को हो रही संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत पर यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि प्रदेश सरकार पूरी तरह किसानों के साथ है। वो किसी के बहकावे में न आएं।
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उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के इशारे पर कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश की पुलिस पूरी तरह सक्षम है। जो राजनीतिक दल किसानों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। वो जब सत्ता में थे तो कुछ नहीं किया। भाजपा सरकार किसानों को समर्पित सरकार है। किसानों को किसी बहकावे में नहीं आना चाहिए।
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बता दें कि मुजफ्फरनगर की महापंचायत में भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। किसान सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार बिना शर्त तीनों काले कृषि कानूनों को वापस ले। जब तक सरकार उनकी बात नहीं सुनेगी आंदोलन चलता रहेगा।
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बता दें कि किसान महापंचायत में पहुंचे राकेश टिकैत ने भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मिशन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड नहीं, मिशन देश बचाने का होगा। देश और संविधान दोनों को बचाना होगा। आज लड़ाई इस मोड़ पर आ गई कि जो 14 करोड़ लोग बेरोजगार है, उनके कंधों पर ये आंदोलन है।
राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने तीन बड़े धोखे दिए हैं। पहला धोखा यह कि रेल व हवाई अड्डे बेचे जाएंगे, यह घोषणा पत्र में नहीं लिखा गया था। फिर किसने यह ताकत दी? दूसरा धोखा यह किया कि बिजली बेचेंगे, प्राइवेट करेंगे, यह उनके घोषणा पत्र में नहीं था। जब लोगों से वोट मांगा, तब नहीं कहा कि बिजली बेचेंगे, फिर अब ऐसा क्यों?
तीसरा धोखा यह किया कि सड़कें बेचेंगे, उस पर टैक्स लगाएंगे। यह भी घोषणा पत्र में नहीं लिखा था। अब देख लो क्या-क्या चीजें बिक रही हैं। एलआईसी जो देश की बड़ी कंपनी है लेकिन अब ये सब बिक रहे हैं। इनके खरीदार अडानी और अंबानी हैं, कोई और नहीं।
दरअसल, किसान महापंचायत पर पूरे देश की नजर है और अगले साल के शुरू में यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सियासी नफा-नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है।