फोन पर गालियां देने वाला उप नगर आयुक्त निलंबित, किराए की रकम न जमा करने का भी आरोप
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नगर आयुक्त और नगर निगम के लिपिक को फोन पर गालियां देने वाले उप नगर आयुक्त को शासन ने निलंबित कर दिया है। निलंबन से पहले हुई जांच में गालियां देने के अलावा अंतिम वेतन प्रमाण पत्र (एलपीसी) में हेरफेर (कूट रचना) करने, किराये का 3.29 लाख रुपये जमा न करने और नगर आयुक्त के आदेशों की अवहेलना करने का भी मामला सामने आया है।
इसको लेकर प्रमुख सचिव नगर विकास की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है। निलंबन के बाद उप नगर आयुक्त को निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया है।
नगर निगम में उप नगर आयुक्त संतोष कुमार यादव ने बीते 25 नवंबर को अधिष्ठान विभाग के लिपिक रमेश सिंह को फोन पर गालियां दी थीं। हद तो यह थी कि उप नगर आयुक्त ने नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी को भी नहीं बख्शा था।
उन्हें भी गालियां दी थीं। इसे लेकर लिपिक की ओर से नगर आयुक्त से शिकायत की गई थी और ऑडियो भी वायरल हुआ था। मामले को लेकर नगर निगम कर्मचारी नेताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया था और महापौर व नगर आयुक्त से कार्रवाई की मांग की थी।
नगर निगम कार्यकारिणी में भी यह मामला उठा था और शासन को रिपोर्ट भी भेजी गई थी। इसके बाद अब शासन ने उप नगर आयुक्त को निलंबित कर दिया। अब उप नगर आयुक्त से 3.29 रुपये किराये की वसूली भी होगी। वहीं एलपीसी में कूट रचना का आपराधिक मामला भी आ गया।
यह था मामला
उप नगर आयुक्त संतोष यादव को 408 दिन की प्रतीक्षा अवधि (नगर निगम में तैनाती नहीं) का वेतन दिया जाना था। इसको लेकर कार्यवाही चल रही थी। इसी बीच सचिव कानपुर विकास प्राधिकरण का पत्र नगर निगम पहुंचा, जिसमें उप नगर आयुक्त पर 3.29 लाख रुपये किराया बकाया होने का उल्लेख किया गया।
उस संबंध में लिपिक रमेश ने उप नगर आयुक्त से फोन पर बात की थी। बकाया किराए की कटौती की आशंका को लेकर उप नगर आयुक्त भड़क गए थे और फोन पर गाली-गलौज शुरू कर दी थी।
शुरू से चर्चा में रहे संतोष
छह महीने पहले जब शासन ने उप नगर आयुक्त संतोष यादव को नगर निगम में तैनात किया था तो उस समय उनको नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी की ओर से जोनल अधिकारी की जिम्मेदारी दी जा रही थी, मगर वह ज्वाइनिंग के बाद लंबी छुट्टी पर चले गए।
लौटे तो कर अधीक्षक नरेंद्र वर्मा का तबादला होने के बाद प्रचार विभाग का काम दिया गया। नगर निगम में आने से पहले उनका कई जगह तबादला हुआ, लेकिन वह गए नहीं। इस दौरान 408 दिन वेटिंग में रहे। अब उसी का वेतन उनको नगर निगम से दिया जाना है।