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मृतक आश्रितों को नगर निगम नही देगा पक्की नौकरी
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मृतक आश्रितों को अब पक्की नौकरी नहीं, नगर निगम में कार्यदायी संस्था के जरिए दी जाएगी अस्थाई नौकरी
नगर निगम में मृतक आश्रितों को अब पक्की नौकरी नहीं मिलेगी। उन्हें अब कार्यदायी संस्था के जरिए ठेेके पर तैनात किया जाएगा। इस फैसले से कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश है। 24 से अधिक मृतक आश्रित पिछले एक साल से नगर निगम में नौकरी के इंतजार में हैं।
नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा और उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश का कहना है कि किसी भी विभाग में मृतक आश्रितों को कार्यदायी एजेंसी के जरिये रखे जाने का नियम नहीं है। नगर निगम में भी अब तक कभी ऐसा नहीं रहा। निगम पहली बार इस तरह की कर्मचारी विरोधी नीति लागू कर रहा है। सरकार का भी ऐसा कोई आदेश नहीं है। इस फैसले का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। मंगलवार को महापौर को इस संबंध में ज्ञापन दिया गया। चार फरवरी को एक बार फिर नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उसके बाद भी प्रशासन नहीं माना तो 11 से 17 फरवरी तक सभी जोनों में जनजागरण किया जाएगा और उसके बाद 18 फरवरी को कार्यबंदी कर मुख्यालय पर धरना देंगे।
अस्थाई नौकरी में मिलते हैं कम पैसे
नगर निगम में कार्यदायी संस्था के करीब आठ हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें करीब सात हजार सफाई के हैं। इनको नगर निगम की ओर से अभी 303 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाता है। वहीं कम्प्यूटर ऑपरेटर व अन्य पदों पर आठ से दस हजार रुपये महीना दिया जाता है। जबकि इन्हीं पदों पर पक्की नौकरी वालों को हर महीने करीब चालीस हजार रुपये वेतन मिलता है। इसके अलावा अन्य सुविधाएं अलग से।
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कर्मचारियों की जरूरत नहीं, तो क्यों बढ़ाएं भार
मृतक आश्रित की नियुक्ति अनुकंपा पर होती है। मृतक आश्रित को नौकरी दी जाएगी, ऐसा कोई नियम नहीं है। वैसे भी सीधी भर्ती पर रोक है। जरूरत होगी तो कार्यदायी संस्था के जरिए योग्य आश्रितों को रखा जाएगा। अभी नगर निगम को कर्मचारियों की भर्ती करने की कोई जरूरत नहीं है। नियुक्ति करने से नगर निगम पर बोझ ही बढ़ेगा। वैसे ही नगर निगम की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त
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नगर निगम में मृतक आश्रितों को अब पक्की नौकरी नहीं मिलेगी। उन्हें अब कार्यदायी संस्था के जरिए ठेेके पर तैनात किया जाएगा। इस फैसले से कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश है। 24 से अधिक मृतक आश्रित पिछले एक साल से नगर निगम में नौकरी के इंतजार में हैं।
नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा और उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश का कहना है कि किसी भी विभाग में मृतक आश्रितों को कार्यदायी एजेंसी के जरिये रखे जाने का नियम नहीं है। नगर निगम में भी अब तक कभी ऐसा नहीं रहा। निगम पहली बार इस तरह की कर्मचारी विरोधी नीति लागू कर रहा है। सरकार का भी ऐसा कोई आदेश नहीं है। इस फैसले का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। मंगलवार को महापौर को इस संबंध में ज्ञापन दिया गया। चार फरवरी को एक बार फिर नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उसके बाद भी प्रशासन नहीं माना तो 11 से 17 फरवरी तक सभी जोनों में जनजागरण किया जाएगा और उसके बाद 18 फरवरी को कार्यबंदी कर मुख्यालय पर धरना देंगे।
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अस्थाई नौकरी में मिलते हैं कम पैसे
नगर निगम में कार्यदायी संस्था के करीब आठ हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें करीब सात हजार सफाई के हैं। इनको नगर निगम की ओर से अभी 303 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाता है। वहीं कम्प्यूटर ऑपरेटर व अन्य पदों पर आठ से दस हजार रुपये महीना दिया जाता है। जबकि इन्हीं पदों पर पक्की नौकरी वालों को हर महीने करीब चालीस हजार रुपये वेतन मिलता है। इसके अलावा अन्य सुविधाएं अलग से।
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कर्मचारियों की जरूरत नहीं, तो क्यों बढ़ाएं भार
मृतक आश्रित की नियुक्ति अनुकंपा पर होती है। मृतक आश्रित को नौकरी दी जाएगी, ऐसा कोई नियम नहीं है। वैसे भी सीधी भर्ती पर रोक है। जरूरत होगी तो कार्यदायी संस्था के जरिए योग्य आश्रितों को रखा जाएगा। अभी नगर निगम को कर्मचारियों की भर्ती करने की कोई जरूरत नहीं है। नियुक्ति करने से नगर निगम पर बोझ ही बढ़ेगा। वैसे ही नगर निगम की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त