अनुसूचित जाति बहुल 1300 पीएम आदर्श गांवों के विकास में रुचि नहीं ले रहे विभागों के अफसर
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प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित 1300 गांवों के विकास में ग्राम विकास समेत कई विभागों के अफसरों की रुचि नहीं हैं। शायद इसीलिए शुक्रवार को इन गांवों के विकास को लेकर शासन स्तर पर हुई बैठक में ग्राम विकास समेत छह विभागों के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे। मामले की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजने का निर्णय लिया गया है।
योजना के तहत अनुसूचित जाति बहुल 1300 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में 260 करोड़ रुपये से विकास कार्य होने हैं। प्रत्येक घर में शौचालय, हर गरीब को आवास, रसोई गैस, बिजली कनेक्शन, बेहतर मार्ग, कम्यूनिटी सेंटर और स्कूल समेत अन्य सुविधाएं दी जानी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने सर्वे कराकर 27 हजार काम एक एक विशेष सॉफ्टवेयर में सूचीबद्ध किए हैं। इन कामों के लिए प्रत्येक चयनित गांव को 20 लाख रुपये मिलेंगे।
मुख्यमंत्री को कराएंगे अवगत
योजना में वही गांव चुने गए हैं, जिनमें आधी से ज्यादा आबादी अनुसूचित जाति की है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना राज्यस्तरीय समिति का गठन किया गया है। शुक्रवार को समिति की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन ग्राम्य विकास विभाग, जल निगम, आईटी, एनआईसी, बैंकर्स और कौशल विकास विभाग के अधिकारी ही नहीं पहुंचे। इस पर रमापति शास्त्री ने गहरी नाराजगी जताई। साथ ही पूरी स्थिति से सीएम को अवगत कराने की बात भी कही।
केंद्र सरकार की इस योजना में एनआईसी और बैंकर्स का भाग न लेना और भी गंभीर बात है, क्योंकि यह दोनों ही सेक्टर केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। वित्तीय समावेश, तकनीकी विकास और नेटवर्क से जोड़ने के लिए इन विभागों के साथ योजना बनाना जरूरी है। इस संबंध में प्रमुख सचिव, समाज कल्याण मनोज सिंह ने बताया कि सभी विभागों से समिति की बैठक में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेने के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं।