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बच्चों पर टूट रहा डेंगू का कहर, वार्ड फुल
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 17 Aug 2013 01:19 AM IST
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बलरामपुर अस्पताल का बाल रोग विभाग में एक बच्ची को डेंगू की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया है।
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साथ ही बदलते मौसम और संक्रमित बीमारियों से पीड़ित दर्जनों मरीज बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किए गए हैं।
बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विभाग के बेड नंबर वी-आठ पर डेंगू से पीड़ित सुल्तानपुर की लक्ष्मी (4) को भर्ती कराया गया है।
लक्ष्मी की मां कैलाशी देवी ने बताया कि बच्ची को काफी दिन से बुखार आ रहा था। इसलिए उसका इलाज सुल्तानपुर के स्थानीय अस्पताल में चल रहा था।
लेकिन अचानक उसकी तबियत खराब होती गई। वहां के डॉक्टर ने डेंगू की शिकायत के बाद उसे लखनऊ रेफर कर दिया।
परिजन नाजुक हालत में बच्ची को केजीएमयू लेकर पहुंचे लेकिन वहां से बच्ची को बिना इलाज के सोमवार को बलरामपुर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
बच्ची का इलाज बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक बच्ची को अभी भी सिर में दर्द के साथ बार-बार बुखार चढ़ जा रहा है लेकिन डॉक्टर उसे शनिवार को डिस्चार्ज करने की बात कह रहे हैं।
परिजनों को अब इस बात की चिंता सताने लगी है कि अगर डॉक्टरों ने उसे डिस्चार्ज कर दिया तो बच्ची की हालत और खराब हो सकती है।
इसी तरह वार्ड में दिमागी बुखार के भी कई मरीज भर्ती हैं। सिद्धार्थनगर की काजू (11) को पिछले आठ महीने से बुखार है।
उसके पिता रामबृज बताते हैं कि स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा था लेकिन उसे अचानक झटके आने लगे। आनन-फानन में उसे बृहस्पतिवार को बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत स्थिर है।
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इसी तरह हरदोई की शिखा (4) को आठ अगस्त को दिमागी बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इसी तरह बाराबंकी के अजय (9) को चार दिन पहले बुखार की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था लेकिन उसकी भी हालत में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है।
अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विष्णुलाल ने बताया कि वार्ड में ज्यादातर भर्ती मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से हैं जिनको बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था।
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लेकिन लोग बच्चों को अस्पताल तब लाते हैं जब उसकी हालत नाजुक हो जाती है। अगर बच्चे जल्द ठीक नहीं हुए तो उन्हें मेनिनजाइटिस होने का खतरा है।
तीन डॉक्टरों के भरोसे सैकड़ों मरीज
बलरामपुर अस्पताल में चार बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती है। लेकिन कुछ दिन पहले डॉ. बृजेश को डेंगू की शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन ने छुट्टी दे दी।
अब केवल तीन डॉक्टर डॉ. विष्णु लाल, डॉ. जीके सिंह और डॉ. राजीव कुमार हैं जिनके उपर ओपीडी में रोजाना आने वाले करीब तीन सौ मरीजों को देखने का भार है।
इसके अलावा वार्ड में 60 से अधिक मरीज भर्ती है जिनको देखने के लिए डॉक्टरों को सुबह राउंड करने में दो घंटे से अधिक का समय लग जाता है।
इस वजह से ओपीडी में आए मरीजों को काफी देर तक डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ता है जिससे कई बार ओपीडी के सामने नोकझोंक की स्थिति बन जाती है।