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Lucknow News: डेंगू-टायफाइड भी दे सकता हेपेटाइटिस का संक्रमण
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लखनऊ। टायफाइड व डेंगू जैसे संक्रमणों से हेपेटाइटिस की आशंका है। ये संक्रमण सीधे हेपेटाइटिस का कारण नहीं बनते, बल्कि ये शरीर में अन्य समस्या पैदा करते हैं, जिससे लिवर प्रभावित हो सकता है। ये जानकारी पीजीआई के पीडियाट्रिक गैस्ट्रो के डॉ. मोइनक सेन शर्मा ने दी।
पीजीआई के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की ओर से विभाग के स्थापना दिवस समारोह के साथ तीसरे एसजीपीजीआई पीडियाट्रिक गैस्ट्रो क्लीनिक का आयोजन किया। मुख्य अतिथि चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के डॉ. वीएस शंकर नारायणन, पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन रहे। डॉ. शंकर नारायणन ने भारत में पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के बीज बोने से लेकर इसके फल प्राप्त करने तक की यात्रा पर प्रेरक भाषण दिया।
कार्यशाला में टायफाइड, डेंगू आदि संक्रमणों से होने वाले हेपेटाइटिस, पेट दर्द विकारों का प्रबंधन, कब्ज, छोटी आंत से रक्तस्राव का प्रबंधन समेत कई अन्य विषयों पर चर्चा हुई। पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के डॉ. एलके भारती ने कहा कि रमजान या नवरात्र में खाली पेट रहकर व्रत रखने वालों का 10 से 15 किलो वजन कम होने पर मेटाबॉलिज्म इलेक्ट्रोलाइट में परिवर्तन होने से शरीर को खतरा रहता है। इससे सोडियम पोटेशियम की मात्रा कम हो जाती है और अचानक पेट भरकर खाना खाने से डायरिया, ब्लड प्रेशर, बेहोशी छाने लगती है। ये रीफीडिग सिंड्रोम के लक्षण होते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे और कम मात्रा में खाना खाने से बीमारी से बच सकते हैं।
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पीजीआई के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की ओर से विभाग के स्थापना दिवस समारोह के साथ तीसरे एसजीपीजीआई पीडियाट्रिक गैस्ट्रो क्लीनिक का आयोजन किया। मुख्य अतिथि चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के डॉ. वीएस शंकर नारायणन, पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन रहे। डॉ. शंकर नारायणन ने भारत में पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के बीज बोने से लेकर इसके फल प्राप्त करने तक की यात्रा पर प्रेरक भाषण दिया।
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कार्यशाला में टायफाइड, डेंगू आदि संक्रमणों से होने वाले हेपेटाइटिस, पेट दर्द विकारों का प्रबंधन, कब्ज, छोटी आंत से रक्तस्राव का प्रबंधन समेत कई अन्य विषयों पर चर्चा हुई। पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के डॉ. एलके भारती ने कहा कि रमजान या नवरात्र में खाली पेट रहकर व्रत रखने वालों का 10 से 15 किलो वजन कम होने पर मेटाबॉलिज्म इलेक्ट्रोलाइट में परिवर्तन होने से शरीर को खतरा रहता है। इससे सोडियम पोटेशियम की मात्रा कम हो जाती है और अचानक पेट भरकर खाना खाने से डायरिया, ब्लड प्रेशर, बेहोशी छाने लगती है। ये रीफीडिग सिंड्रोम के लक्षण होते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे और कम मात्रा में खाना खाने से बीमारी से बच सकते हैं।
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