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यूपी में 'जननी सुरक्षा' के साथ हो रहा खिलवाड़
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 27 Jul 2013 09:37 AM IST
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रेलवे का दावा है कि सूचना मिलने के 15 मिनट के भीतर स्टेशन पर एंबुलेंस और डॉक्टर उपलब्ध होंगे।
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इन दावों की हकीकत उस वक्त सामने आई जब एक गर्भवती घंटे भर तक प्रसव पीड़ा से तड़पती रही।
इस बीच न डॉक्टर पहुंचे न एंबुलेंस। वह भी तब जब कमांड अस्पताल स्टेशन से चंद कदमों की दूरी पर ही स्थित है।
108 एंबुलेंस सेवा से भी मदद नहीं मिली। इतना ही नहीं दर्द से कराह रही पीड़िता को चारबाग स्टेशन पर उतार कर प्लेटफार्म पर ही घंटो बैठाए रखा गया।
इसके बाद जीआरपी ने टैंपो का इंतजाम कर उसे मध्य कमान अस्पताल भेजवाया।
बलिया के रसड़ा निवासी प्रवीन सिंह सेना के जवान हैं। वह पत्नी ममता और मां के साथ मध्य कमान अस्पताल में उपचार के लिए दून एक्सप्रेस से लखनऊ आ रहे थे।
ट्रेन के बाराबंकी निकलने के बाद ममता को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। इसकी सूचना टीटीई ने कंट्रोल रूम को दी।
कंट्रोल रूम से चारबाग स्टेशन पर आरपीएफ, जीआरपी और स्टेशन मास्टर को संदेश भेजा गया।
जीआरपी ने 108 और स्टेशन कर्मचारियों ने रेलवे अस्पताल को एम्बुलेंस के लिए फोन किया। इधर शाम 6:20 बजे ट्रेन लखनऊ पहुंची।
दर्द से बुरी तरह कराह रही महिला को बोगी से उतारकर प्लेटफार्म पर ही बैठा दिया गया। कई बार फोन करने के बावजूद एंबुलेंस नहीं आई।
महिला की हालत बिगड़ती देख जीआरपी जवानों ने टैंपो का इंतजाम कर ममता को 7: 30 बजे मध्य कमांड अस्पताल भेजा।
जीआरपी प्रभारी गिरिजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि एम्बुलेंस की 24 घंटे व्यवस्था के लिए रेलवे को पत्र लिखा गया है।