इस तरह बारी-बारी से खुले 'दागी मंत्री' के डिग्री फर्जीवाड़े
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आम आदमी पार्टी के मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर को दिल्ली पुलिस जांच के लिए फैजाबाद ले जा रही है। बुधवार सुबह पुलिस के साथ जितेन्द्र सिंह तोमर लखनऊ पहुंचे।
सुबह करीब आठ बजे जितेन्द्र सिंह लखनऊ रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। दिल्ली पुलिस उन्हे फरक्का एक्सप्रेस में बिठाकर फैजाबाद लेकर आई।
विवि पहुंचने के बाद कैंपस के गेट को बंद कर लिया गया और इसके बाद शुरू हुई डिग्री की सत्यापन की गहन जांच प्रक्रिया। लगभग पांच घंटे तक यह प्रक्रिया होती रही। बाद में जांच में पाया गया कि उनकी बीएससी की डिग्री फर्जी है।
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से बीएससी डिग्री हासिल करने का कोई रिकार्ड नहीं मिला। न ही साकेत पीजी कॉलेज में 1986-87 व 1987-88 में दो वर्षीय इस कोर्स में दाखिला था।
इधर सुबह लखनऊ पहुंचकर जितेन्द्र सिंह तोमर ने पत्रकारों से कहा कि मेरी डिग्री ठीक है, ये सब मोदी सरकार की साजिश है। मोदी सरकार हमारी पार्टी को बदनाम करने के लिए ऐसा कर रही है।
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर की एलएलबी की डिग्री फर्जी पाई गई थी। इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई है। जिसके बाद मंगलवार को तोमर ने इस्तीफा भी दे दिया था।
ये है फर्जी डिग्री का मामला
दिल्ली सरकार के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की एलएलबी ही नहीं बीएससी की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। फर्जी डिग्री लेने का खेल सबसे पहले यहां साकेत महाविद्यालय से शुरू हुआ।
1988 में जिस बीएससी डिग्री के बल पर भागलपुर में एलएलबी में तोमर ने प्रवेश लिया,उसको इसी साल जनवरी माह में जांच के बाद अवध विवि ने फर्जी करार दिया था। जबकि भागलपुर विवि ने भी अप्रैल माह के आखिर में दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कानून मंत्री की एलएलबी डिग्री को भी फर्जी बता दी थी।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 के दौरान त्रिनगर विधानसभा सीट से आप पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उतरे जितेंद्र सिंह तोमर पुत्र बलबीर सिंह तोमर की स्नातक डिग्री फर्जी होने का आरोप लगा था।
यह डिग्री वर्ष 1988 में डा.राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध का.सु. साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय अयोध्या से जारी बताई गई थी। गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील क्षेत्र के रावली कलां निवासी प्रदीप पुत्र वेदप्रकाश ने डिग्री की जांच के लिए अवध विवि प्रशासन को पत्र लिखा। कुलपति के निर्देश पर परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी ने गोपनीय विभाग से जांच कराई थी।
जांच में जितेंद्र सिंह तोमर की बीएससी द्वितीय वर्ष, अनुक्रमांक-31331, वर्ष 1988 की उपाधि, अंकपत्र व अनुक्रमांक को पूर्णतया फर्जी पाया गया था।