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एसिड अटैक की पीड़ा दुष्कर्म से कम नहीं, सजा का डर हो तो रुकेंगे ये अपराध: दीपिका पादुकोण

Mon, 06 Jan 2020 12:28 PM IST
ishwar ashish रोली खन्ना/अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 06 Jan 2020 12:28 PM IST
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deepika padukone talks to amar ujala about experience of working in film Chhapaak
दीपिका पादुकोण - फोटो : अमर उजाला

एसिड अटैक की पीड़ा दुष्कर्म से कम नहीं... वह उससे छोटा अपराध नहीं है... इसके बावजूद इस पर चर्चा कम होती है। तेजाब की बिक्री पर रोक है, फिर भी यह लोगों को मिल जाता है... सजा का डर हो तो एसिड अटैक जैसे अपराधों को रोका जा सकता है। यह कहना है ‘छपाक’ फिल्म में एसिड फाइटर का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का।

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वे इस फिल्म के प्रमोशन के लिए रविवार को लखनऊ में थीं। उन्होेंने इस फिल्म में अपने किरदार, रील और रियल लाइफ में अंतर से जुड़ी बातें साझा कीं। इस दौरान एसिड अटैक फाइटर लक्ष्मी अग्रवाल भी मौजूद थीं। दीपिका ने फिल्म में लक्ष्मी के ही संघर्ष व पीड़ा को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है।

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जानें- सुंदरता क्या है दीपिका की नजर में

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दीपिका पादुकोण - फोटो : अमर उजाला
 एक सुंदर स्त्री रानी पद्मावती और अब ऐसी युवती का किरदार, जिसका चेहरा तेजाब से जला दिया गया है। सुंदरता क्या है आपकी नजर में?
अभी तक हम एक संकीर्ण सोच के साथ जीते आए हैं। गोरापन, लंबे बाल, बड़ी आंखें सुंदरता की परिभाषा मानी जाती रही हैं। मेरे हिसाब से लक्ष्मी और इन जैसी लड़कियां भी सुंदर हैं। ये हर आम और खास लड़कियों की तरह हैं। आत्मविश्वास से भरी हर लड़की सुंदर है। हम इस फिल्म के जरिए बताना चाहते हैं कि जो सुंदर दिखता है, सिर्फ वही सुंदरता नहीं है। नया नजरिया विकसित करना जरूरी है।

एसिड हमले नहीं रुक रहे... क्या युवा राह भटक गए हैं? किसे जिम्मेदार मानती हैं आप?
कोई एक कारण या एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है। शिक्षा भी मायने रखती है। आप कैसे लोगों के साथ उठते-बैठते हैं... टीवी में क्या देखा जा रहा है, इसका भी असर पड़ता है। इस फिल्म में हमने बताने की कोशिश की है कि तेजाब लोगों के लिए बाजार में कहीं न कहीं उपलब्ध है। एसिड हमले करने वालों के दिल में कानून का खौफ ही नहीं है।

बोलीं- भारत में लोगों के मन में सजा का डर नहीं

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दीपिका पादुकोण - फोटो : अमर उजाला
तमाम कवायद और जागरूकता के प्रयास के बावजूद एसिड हमला हो रहा है, दुष्कर्म रुक नहीं रहे..?
भारत में लोगों के मन में सजा का डर नहीं है। एक उदाहरण देती हूं... हम विदेश जाते हैं, पर वहां कुछ भी नियम विरुद्ध करने से डरते हैं। क्या कभी सोचा है क्यों? इसलिए क्योंकि हमें मालूम है कि नियम तोड़ने पर हमें सजा भुगतनी होगी। बस मानसिकता का फर्क है।
 
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