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Lucknow News: बिना बायोप्सी कराए बता दिया कैंसर रोगी
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लखनऊ। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में ढाई करोड़ रुपये के दवा घोटाले की जांच में कमेटी को अहम सुराग मिले हैं। सामने आया है कि बायोप्सी, पैट सीटी स्कैन, एमआरआई और स्टेजिंग जैसी अनिवार्य जांचों के बिना ही मरीजों को कैंसर रोगी बता दिया गया। इतना ही नहीं कागजों पर इन्हें कैंसर की महंगी इम्यूनोथेरेपी और अन्य दवाओं की डोज भी दिखा दी गई।
जांच कमेटी को फाइलों की पड़ताल में ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें मरीजों को एक से दो लाख रुपये तक की कीमत वाली दवाओं की डोज जारी कर दी गई। हालांकि, मरीजों के रिकॉर्ड में कैंसर की पुष्टि करने वाली बायोप्सी रिपोर्ट नहीं मिली। डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी कैंसर मरीज का इलाज शुरू करने से पहले बायोप्सी से रोग की पुष्टि करना जरूरी होता है। साथ ही सीटी स्कैन, एमआरआई और स्टेजिंग की प्रक्रिया से तय होता है कि कैंसर शरीर में कितना फैला है और मरीज को किस तरह का इलाज देना चाहिए।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में केवल ओपीडी के परचे और सीमित दस्तावेज के आधार पर मरीजों को कैंसर रोगी दिखाकर महंगी दवाएं जारी कर दी गईं। जांच अधिकारी हर दस्तावेज की गहनता से जांच कर रहे हैं। बायोप्सी रिपोर्ट, रेडियोलॉजिकल जांच, स्टेजिंग रिपोर्ट और दवा वितरण के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि जिन मरीजों के नाम पर दवाएं निकाली गईं, उन्हें ये दी गई या नहीं।
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जांच कमेटी को फाइलों की पड़ताल में ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें मरीजों को एक से दो लाख रुपये तक की कीमत वाली दवाओं की डोज जारी कर दी गई। हालांकि, मरीजों के रिकॉर्ड में कैंसर की पुष्टि करने वाली बायोप्सी रिपोर्ट नहीं मिली। डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी कैंसर मरीज का इलाज शुरू करने से पहले बायोप्सी से रोग की पुष्टि करना जरूरी होता है। साथ ही सीटी स्कैन, एमआरआई और स्टेजिंग की प्रक्रिया से तय होता है कि कैंसर शरीर में कितना फैला है और मरीज को किस तरह का इलाज देना चाहिए।
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जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में केवल ओपीडी के परचे और सीमित दस्तावेज के आधार पर मरीजों को कैंसर रोगी दिखाकर महंगी दवाएं जारी कर दी गईं। जांच अधिकारी हर दस्तावेज की गहनता से जांच कर रहे हैं। बायोप्सी रिपोर्ट, रेडियोलॉजिकल जांच, स्टेजिंग रिपोर्ट और दवा वितरण के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि जिन मरीजों के नाम पर दवाएं निकाली गईं, उन्हें ये दी गई या नहीं।
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