जून में मरीजों के साथ बढ़ा मौतों का आंकड़ा, लखनऊ में अब तक 11 मौतें
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वहीं, पहली मौत 15 अप्रैल को नजीराबाद निवासी वृद्ध की हुई। मई में मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हुई और 31 तक आंकड़ा 412 पहुंच गया। इस दौरान राजधानी में चार मौतें हो चुकी थीं। इनमें 20 मई को मौलवीगंज, 26 मई को फूलबाग, 29 मई को गोलागंज की महिला ने दम तोड़ा था। इसके बाद एक से 16 जून के बीच मरीजों की संख्या 716 पहुंच गई।
यानी 16 दिन में 288 मरीज बढ़े। वहीं, मौतों का आंकड़ा देखें तो जून में राजधानी के सात लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह अब तक राजधानी में कुल मौतें 11 हो गई है। वहीं, शहर के अस्पतालों में दूसरे जिलों से आने वालों को जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा 21 पहुंच जाता है।
बुधवार को हुई तीन मौतों में एक गोंडा का निवासी है। इससे पहले राजधानी में श्रावस्ती के वृद्ध, आगरा की महिला, रायबरेली के कैंसर पीड़ित वृद्ध, सुल्तानपुर के वृद्ध, उरई के डॉक्टर, बलरामपुर निवासी टीबी पीड़ित और रायबरेली, झांसी व बहराइच के एक-एक वृद्ध की मौत हो चुकी है।
एसजीपीजीआई की टीम करती है ऑडिट
कोराना से होने वाली मौत का ऑडिट एसजीपीजीआई की टीम करती है। शासन ने जिलों के लिए अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी है। राजधानी में चार मौत की ऑडिट हो चुकी है, जबकि अन्य का प्रक्रिया में है।
मृतकों में ज्यादातर पहले से गंभीर थे
स्वास्थ्य विभाग के संक्रामक रोग नियंत्रण अभियान के प्रभारी एसीएमओ डॉ. केपी त्रिपाठी का कहना है कि अभी तक जिनकी मौत हुई, वे सभी पहले से बीमारियों से पीड़ित थे। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि मौत की वजह सिर्फ कोरोना था। इतना जरूर है कि वायरस की चपेट में आने से इनकी पहले से चल रहीं समस्याएं बढ़ गई। मरने वालों की प्रथम दृष्टया जो रिपोर्ट सामने आई है उनमें ज्यादातर उम्रदराज हैं। कुछ युवाओं की मौत हुई है तो वे टीबी सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित थे। ऑडिट टीम की रिपोर्ट से स्थिति साफ होगी।