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Lucknow News: शक होने पर डीन ने बिछाया जाल

Wed, 22 Apr 2026 02:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 02:29 AM IST
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Dean sets a trap when he suspects
पकड़ा गया आरोपी फर्जी डॉक्टर हस्साम।
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में रमीज मलिक के मामले से सीख लेते हुए केजीएमयू प्रशासन अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। इसी के तहत छात्रों के बीच जागरूकता फैलाई गई। छात्रों से परिसर में घूम रहे संदिग्ध व्यक्ति के बारे में सूचना मिलने पर डीन पैरामेडिकल प्रो. केके सिंह ने पूरा जाल फैलाया और आरोपी को गिरफ्त में ले लिया।
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प्रो. केके सिंह ने बताया कि परिसर में खुद को डॉक्टर कहकर घूम रहे शख्स के बारे में छात्रों ने करीब एक सप्ताह पहले जानकारी दी थी। इसके बाद उन्होंने इसकी जानकारी जुटानी शुरू की। छात्रों से उन्हें पता चला कि हस्साम स्वास्थ्य शिविर आयोजित करता है। ऐसे में उन्होंने छात्रों के माध्यम से खुद को शिविर में मुख्य अतिथि बनाने के लिए कहा। इसमें उन्हें सफलता मिली।
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19 अप्रैल को जब वह शिविर में पहुंचे तो फिर उन्हें पूरा मामला समझते देर नहीं लगी। आरोपी खुद को अपनी संस्था कार्डियो सेवा संस्थान का सह संस्थापक बता रहा था। वहां केजीएमयू की कुछ छात्राएं भी थीं, जो हस्साम से बहुत ज्यादा प्रभावित थीं। ऐसे में उनका शक गहराया। छात्राओं से पूछताछ करने पर 27 अप्रैल को एम्स दिल्ली की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की बात पता चली। जब उन्होंने इसका आदेश देखा तो सिर घूम गया। आदेश में कई छात्राओं और कुछ छात्रों के नाम थे और नीचे डॉ. केके सिंह के नाम से फर्जी हस्ताक्षर थे। कागज कब्जे में लेने के बाद मंगलवार को जब वह कैंपस आया तो उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया।
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असली सरगना कोई और ...

हस्साम ने केजीएमयू में हुई पूछताछ में अपने साथ कई लोगों के नाम बताए, लेकिन ये नाम सही होने की गुंजाइश नहीं नजर आ रही है। हालांकि, जिस तरह वह स्वास्थ्य शिविर आयोजित करता है, उससे एक बात तय है कि इसमें केजीएमयू के साथ ही कुछ और संस्थानों के लोग शामिल हैं। इसमें कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम भी हो सकते हैं, क्योंकि शिविर की व्यवस्था करना सामान्य लोगों के बस की बात नहीं होती। केजीएमयू में हुई पूछताछ में उसने बताया कि वह कभी-कभी खुद को डॉक्टर लिखता है और कई बार सामाजिक कार्यकर्ता भी लिख लेता है। हस्साम के अनुसार, वह समाज की सेवा करना चाहता था। इसके लिए वह अस्पताल बनाना चाहता था। हालांकि, जब उससे यह पूछा गया कि यह फर्जीवाड़ा करते समय उसके दिमाग में यह बात नहीं आई कि वह गलत कर रहा है, तो जवाब था कि उसे लगा था कि गलत है, पर उसने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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