बाल पर किया बवाल, खाने में चूहे पर चुप क्यों मंत्रीजी?
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यूपी में मिड डे मील देने में जबरदस्त लापरवाही सामने आ रही है। बुधवार को बाराबंकी में कढ़ी में मरी हुई छिपकली मिलने की खबर के बाद अब सहारनपुर में मिडडे मील में मरा हुआ चूहा मिला है।
सहारनपुर में सिटी कोतवाली के नुमाइश कैंप प्राइमरी स्कूल में बच्चों के मिडडे मील में मरा हुआ चूहा निकला। हालांकि किसी बच्चे के बीमार होने की सूचना नहीं है लेकिन एहतियातन बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करा लिया गया।
ब्लाक निंदूरा के प्राथमिक विद्यालय अनवारी में बुधवार को एमडीएम में बनाई गई कढ़ी में एक छात्रा की थाली में मरी छिपकली मिली।
छिपकली देख छात्र-छात्राओं में हड़कंप मच गया। तब तक कढ़ी चावल करीब 15 बच्चों ने ही खाया था।
हालांकि देर शाम तक किसी बच्चे के बीमार होने की सूचना नहीं थी।
वहीं सीतापुर में बाल पुष्टाहार वितरण के दौरान मिश्रिख के तरसावां गांव में बुधवार को हलवे में कीड़े देख बच्चों ने खाने से इन्कार कर दिया। यह बात जब अभिभावकों को पता चली तो सभी आंगनबाड़ी केंद्र गए और हंगामा किया।
पहले भी सामने आई है ऐसी लापरवाही
यूपी के अम्बेडकरनगर जिले में अभी हाल ही में ऐसा मामला सामने आया था। जिले की भीटी तहसील में सम्मनपुर छितुनियां प्राथमिक स्कूल में मिड डे मील खाकर 24 बच्चे बीमार हो गए थे।
घटना में दिलचस्प मोड़ तब आया, जब जिम्मेदार अफसर इस घटना के बारे में गोलमोल बयान देने लगे। स्कूल के हेडमास्टर का कहना था कि बच्चे मिड डे मील खाने से बीमार हुए, जबकि अपर बेसिक शिक्षा आयुक्त का कहना है कि मंगलवार दोपहर स्कूल में मिड डे मील बना ही नहीं।
इससे पहले मथुरा के अक्षय पात्र संस्था की तरफ से दिए गए खाने में कीड़े निकलने पर उसे बच्चों ने खाने से इनकार कर दिया और उनके परिजनों ने खाने को फिंकवा दिया।
इसी तरह शंकर नगर हायर सेकेंड्री स्कूल सहित कई स्कूलों में इस तरह की घटनाएं पहले भी चर्चा में आ चुकी है। वहीं 2013 में हुई एक बड़ी घटना में बिहार में मिड डे मील खाने से 22 बच्चों की मौत तक हो चुकी है।