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महंगी बिजली खरीदकर टोरेंट पावर को सस्ते में बेच रहा दक्षिणांचल निगम, हो रहा करोड़ों का नुकसान
Wed, 09 Sep 2020 01:20 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 09 Sep 2020 01:20 PM IST
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उप्र पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन के प्रस्तावित टैरिफ से स्पष्ट हो गया है कि सरकारी विद्युत वितरण निगम महंगी दरों पर बिजली खरीद कर निजी क्षेत्र की कंपनियों को सस्ती दरों पर बेच रही है। ऑडिट में भी माना गया है कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम 5.26 रुपये/यूनिट की दर पर खरीद कर टोरेंट पावर आगरा को 4.45 रुपये/यूनिट की दर पर बेच रहा है।
इससे निगम को हर साल 162 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इसका खामियाजा प्रदेश की तीन करोड़ उपभोक्ताओं को महंगी बिजली के रूप में भुगतना पड़ रहा है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था के निजीकरण की चर्चाओं के बीच उप्र विद्युत उपभोक्ता परिषद ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित बिजली दरों के आंकड़ों का अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला है कि निजीकरण की व्यवस्था सफल नहीं होगी।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया की दक्षिणांचल कंपनी द्वारा स्वतंत्र ऑडिटर फर्म से कराई गई ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वर्मा ने सरकार से टोरेंट पावर के अनुबंध की समीक्षा करने के साथ ही मामले की जांच कराने की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने निजीकरण के दोनों प्रयोगों टोरेंट पावर व नोएडा पावर की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी, लेकिन जांच अब तक लंबित है। उन्होंने सरकार से दोनों निजी घरानों के अनुबंध को समाप्त कर जनहित में निजीकरण पर प्रदेश में रोक लगाने की भी मांग की है।
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इससे निगम को हर साल 162 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इसका खामियाजा प्रदेश की तीन करोड़ उपभोक्ताओं को महंगी बिजली के रूप में भुगतना पड़ रहा है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था के निजीकरण की चर्चाओं के बीच उप्र विद्युत उपभोक्ता परिषद ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित बिजली दरों के आंकड़ों का अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला है कि निजीकरण की व्यवस्था सफल नहीं होगी।
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परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया की दक्षिणांचल कंपनी द्वारा स्वतंत्र ऑडिटर फर्म से कराई गई ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वर्मा ने सरकार से टोरेंट पावर के अनुबंध की समीक्षा करने के साथ ही मामले की जांच कराने की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने निजीकरण के दोनों प्रयोगों टोरेंट पावर व नोएडा पावर की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी, लेकिन जांच अब तक लंबित है। उन्होंने सरकार से दोनों निजी घरानों के अनुबंध को समाप्त कर जनहित में निजीकरण पर प्रदेश में रोक लगाने की भी मांग की है।