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अपराध की जटिल गुत्थियां सुलझेंगी आसानी से, प्रदेश में साइबर ट्रेनिंग लैब का हुआ उद्घाटन
Wed, 05 Jun 2019 12:18 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Wed, 05 Jun 2019 12:18 AM IST
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अब प्रदेश में भी साइबर से जुड़े गंभीर मामलों की गुत्थियां आसानी से सुलझाई जा सकेंगी। इसके लिए मंगलवार को डीजीपी ओपी सिंह ने यूपी-100 बिल्डिंग में साइबर ट्रेनिंग लैब का उद्घाटन किया।
इसकी स्थापना निर्भया फंड से साइबर क्राइम प्रिवेंशन अगेंस्ट वीमेन एंड चाइल्ड कार्यक्रम के तहत की गई है। एसटीएफ की देखरेख में तैयार 25 सीट वाली लैब में प्रदेश के थानों के मुंशी और एसएचओ के साथ विवेचक व अभियोजन अधिकारी प्रशिक्षित किए जाएंगे।
डीजीपी ने बताया कि साइबर अपराध के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है। बीते 2018 में साइबर अपराध से संबंधित 6589 केस दर्ज किए गए। इसमें सबसे अधिक संख्या राजधानी लखनऊ की है, जहां 1036 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक मामले ओटीपी पूछकर ट्रांजेक्शन करने के हैं।
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फेक आईडी बनाकर लड़कियों को परेशान करने और आपराधिक धोखाधड़ी के भी कई मामले हैं। इस मौके पर डीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार, एडीजी तकनीकी सेवा आशुतोष पांडेय, एडीजी क्राइम केएस प्रताप कुमार, एडीजी यूपी 100 डीके ठाकुर, आईजी एसटीएफ अमिताभ यश और एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
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इसकी स्थापना निर्भया फंड से साइबर क्राइम प्रिवेंशन अगेंस्ट वीमेन एंड चाइल्ड कार्यक्रम के तहत की गई है। एसटीएफ की देखरेख में तैयार 25 सीट वाली लैब में प्रदेश के थानों के मुंशी और एसएचओ के साथ विवेचक व अभियोजन अधिकारी प्रशिक्षित किए जाएंगे।
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डीजीपी ने बताया कि साइबर अपराध के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है। बीते 2018 में साइबर अपराध से संबंधित 6589 केस दर्ज किए गए। इसमें सबसे अधिक संख्या राजधानी लखनऊ की है, जहां 1036 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक मामले ओटीपी पूछकर ट्रांजेक्शन करने के हैं।
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फेक आईडी बनाकर लड़कियों को परेशान करने और आपराधिक धोखाधड़ी के भी कई मामले हैं। इस मौके पर डीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार, एडीजी तकनीकी सेवा आशुतोष पांडेय, एडीजी क्राइम केएस प्रताप कुमार, एडीजी यूपी 100 डीके ठाकुर, आईजी एसटीएफ अमिताभ यश और एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
हत्या, डकैती और लूट से कम नहीं है साइबर अपराध
डीजीपी ने कहा कि साइबर अपराध हत्या, डकैती और लूट से कम नहीं है। इन घटनाओं में अपराधी अज्ञात होता है। इसके लिए ही इस लैब की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि भविष्य में इसका और विस्तार किया जाएगा। हमारी कोशिश है कि इसके लिए एक अलग से एडीजी का पद हो जो जटिल मामलों को सुलझा सके। आने वाले दिनों में दो से तीन घंटे का ट्रेनिंग कोर्स तैयार कर स्कूल और कालेजों में अवेयरनेस प्रोग्राम चलाया जाएगा।
अब हर तरह के अपराध में हो रहा साइबर अपराध
एसपी साइबर क्राइम सुशील घुले ने पावर प्वॉइंट प्रजेंटेशन से बताया कि आजकल के अपराध में मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग जरूर होता है। कई बार सुबूत मिटाने के लिए मोबाइल को फार्मेट या फाइल डिलीट कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि लैब में तीन दिन के कोर्स में थानों के मुंशी और थाना प्रभारियों यह समझ सकेंगे कि शिकायतकर्ता का नेचर कैसा है।
पांच दिनों के कोर्स में एविडेंस कलेक्शन और उसे सुरक्षित रखने के तरीके हार्ड डिस्क, कंप्यूटर, लैपटॉप को सीजर करना बताया जाएगा। मोबाइल, स्मार्टफोन डेटा रिकवरी, पासवर्ड रिकवरी के विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे। यहां सीसीटीवी एनालिसिस के लिए अपडेटेड सॉफ्टवेयर खरीदे गए हैं। भारत सरकार इस प्रोजेक्ट पर चार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। अगले दो वर्षों में 1540 मुंशी और थाना प्रभारी, 1200 अभियोजन अधिकारी और 950 विवेचकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
साइबर कवच बनाने पर भी विचार
डीजीपी ने बताया कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी फंड से तीन से चार महीने में नोएडा में वृहद साइबर रिसर्च सेंटर बनाने पर विचार किया जा रहा है।
अब हर तरह के अपराध में हो रहा साइबर अपराध
एसपी साइबर क्राइम सुशील घुले ने पावर प्वॉइंट प्रजेंटेशन से बताया कि आजकल के अपराध में मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग जरूर होता है। कई बार सुबूत मिटाने के लिए मोबाइल को फार्मेट या फाइल डिलीट कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि लैब में तीन दिन के कोर्स में थानों के मुंशी और थाना प्रभारियों यह समझ सकेंगे कि शिकायतकर्ता का नेचर कैसा है।
पांच दिनों के कोर्स में एविडेंस कलेक्शन और उसे सुरक्षित रखने के तरीके हार्ड डिस्क, कंप्यूटर, लैपटॉप को सीजर करना बताया जाएगा। मोबाइल, स्मार्टफोन डेटा रिकवरी, पासवर्ड रिकवरी के विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे। यहां सीसीटीवी एनालिसिस के लिए अपडेटेड सॉफ्टवेयर खरीदे गए हैं। भारत सरकार इस प्रोजेक्ट पर चार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। अगले दो वर्षों में 1540 मुंशी और थाना प्रभारी, 1200 अभियोजन अधिकारी और 950 विवेचकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
साइबर कवच बनाने पर भी विचार
डीजीपी ने बताया कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी फंड से तीन से चार महीने में नोएडा में वृहद साइबर रिसर्च सेंटर बनाने पर विचार किया जा रहा है।