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एटीएम पर सावधानः भीड़ में छिपे हैं साइबर ठग, चुरा रहे पासवर्ड
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 17 Nov 2016 08:29 PM IST
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सावधान, रुपये निकालने के लिए एटीएम बूथ पर जुटी भीड़ के बीच साइबर ठग भी छिपे हुए हैं। ये ठग रुपये निकालने आए लोगों के एटीएम कार्ड पर लिखा नंबर और पासवर्ड देखकर उनकी रकम ऑनलाइन गायब कर रहे हैं।
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1000 और 500 रुपये के करेंसी नोट बंद होने के बाद से ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हजरतगंज स्थित साइबर सेल के उपनिरीक्षक विजयवीर सिंह सिरोही के मुताबिक बीते करीब एक सप्ताह में ऑनलाइन रकम गायब होने की शिकायतें आठ गुना बढ़ी हैं।
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पहले दो-तीन दिन में ऐसे तीन-चार मामलों की शिकायतें ही मिलती थीं लेकिन आठ नवंबर को पुरानी करेंसी के 1000 व 500 रुपये के नोट बंद करने की घोषणा के बाद से इस प्रकार की शिकायतों में इजाफा हुआ है।
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नौ नवंबर से 14 नवंबर के बीच साइबर सेल को ऑनलाइन ठगी की करीब 30 शिकायतें मिल चुकी हैं। इसमें लखनऊ के छितवापुर वीरनगर निवासी बृजेंद्र शुक्ला, हसनगंज के रामखेलावन, कृष्णानगर के सिंधुनगर के विजय बाजपेयी, मोहनलालगंज की न्यू कॉलोनी निवासी पैंजी रानी दत्त, राजाजीपुरम के सौरभ खत्री, सरोजनीनगर के हिंदनगर निवासी मनीष त्रिपाठी, सीतापुर के अटरिया गढ़ी गांव के रामलखन शर्मा और सीतापुर रोड मड़ियांव के भरतनगर निवासी जमील समेत कई लोग ठगी के शिकार हो चुके हैं।
उपनिरीक्षक सिरोही के मुताबिक, एटीएम बूथ पर इस वक्त लोगों में रुपये निकालने की होड़ लगी है। भीड़ इतनी ज्यादा है कि बूथ के भीतर एक बार में एक ही व्यक्ति के जाने की अनुमति के बावजूद आठ से दस लोग घुसते हैं।
लोगों को बूथ में घुसने से रुपये निकालने वाले टोक रहे हैं, न ही सिक्योरिटी गार्ड। भीड़ में शामिल साइबर क्रिमिनल आसानी से लोगों के एटीएम कार्ड की डिटेल हासिल कर रहे हैं।
कार्ड किस बैंक का है, कार्डधारक का नाम क्या है, कार्ड का नंबर क्या है, मैग्नेटिक चिप के नीचे लिखा तीन अंकों का सीवीवी नंबर और पासवर्ड देख साइबर ठग ऑनलाइन रकम गायब कर रहे हैं।
साइबर सेल के जानकारों ने बताया कि इस गिरोह में बैंक के लोग भी शामिल हैं जो कार्ड का नंबर अथवा कार्डधारक का नाम और पासवर्ड पता चलते ही बाकी जानकारियां बैंकों से हासिल करके हैकरों को दे रहे हैं।
बूथ से निकलते ही तत्काल बदल लें पासवर्ड
डेमो
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एटीएम बूथ पर भीड़ के चलते पासवर्ड की गोपनीयता सुरक्षित रख पाना संभव नहीं है। ऐसे में एटीएम कार्ड धारकों को तत्काल अपना पासवर्ड बदल देना चाहिए।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर भीड़ की वजह से बूथ में पासवर्ड नहीं बदल पा रहे हों तो किसी खाली बूथ में जाकर अपना पासवर्ड चेंज कर सकते हैं। कई एटीएम बूथ ऐसे हैं जिनमें कैश नहीं है। वहां सन्नाटा रहता है इसलिए आसानी से पासवर्ड चेंज किया जा सकता है। नजर डालें इन केसेज पर...
केस-1
मोहनलालगंज के देवीसिंहखेड़ा निवासी रमेश कुमार की पत्नी कांति इलाके के ही बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम बूथ से रुपये निकालने गईं। लंबी लाइन का फायदा उठा बूथ के पास मौजूद युवकों ने उन्हें मदद का ऑफर दिया। कांति ने अपना एटीएम कार्ड उन्हें थमा दिया। युवकों ने रुपये निकाल उन्हें दे दिए। कुछ घंटे बाद उनके मोबाइल पर अकाउंट से 50,000 रुपये निकलने का मैसेज आया। कांति ने साइबर सेल में शिकायत की है।
केस-2
हसनगंज के मदेयगंज निवासी वर्तिका सिंह इंडियन ओवरसीज बैंक के एटीएम बूथ में रुपये निकालने गई थीं। वर्तिका की बारी आई तो उन्होंने एटीएम कार्ड मशीन में डालकर पासवर्ड डाला। बूथ इतनी भीड़ थी कि वर्तिका चाहकर भी पासवर्ड को छिपा न सकीं। वर्तिका बूथ से बाहर आ गईं और उन्हें पासवर्ड बदलने का मौका नहीं मिला। 24 घंटे भी नहीं बीते कि उनके अकाउंट से 24,000 रुपये निकल गए।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर भीड़ की वजह से बूथ में पासवर्ड नहीं बदल पा रहे हों तो किसी खाली बूथ में जाकर अपना पासवर्ड चेंज कर सकते हैं। कई एटीएम बूथ ऐसे हैं जिनमें कैश नहीं है। वहां सन्नाटा रहता है इसलिए आसानी से पासवर्ड चेंज किया जा सकता है। नजर डालें इन केसेज पर...
केस-1
मोहनलालगंज के देवीसिंहखेड़ा निवासी रमेश कुमार की पत्नी कांति इलाके के ही बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम बूथ से रुपये निकालने गईं। लंबी लाइन का फायदा उठा बूथ के पास मौजूद युवकों ने उन्हें मदद का ऑफर दिया। कांति ने अपना एटीएम कार्ड उन्हें थमा दिया। युवकों ने रुपये निकाल उन्हें दे दिए। कुछ घंटे बाद उनके मोबाइल पर अकाउंट से 50,000 रुपये निकलने का मैसेज आया। कांति ने साइबर सेल में शिकायत की है।
केस-2
हसनगंज के मदेयगंज निवासी वर्तिका सिंह इंडियन ओवरसीज बैंक के एटीएम बूथ में रुपये निकालने गई थीं। वर्तिका की बारी आई तो उन्होंने एटीएम कार्ड मशीन में डालकर पासवर्ड डाला। बूथ इतनी भीड़ थी कि वर्तिका चाहकर भी पासवर्ड को छिपा न सकीं। वर्तिका बूथ से बाहर आ गईं और उन्हें पासवर्ड बदलने का मौका नहीं मिला। 24 घंटे भी नहीं बीते कि उनके अकाउंट से 24,000 रुपये निकल गए।