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एकेटीयू से साइबर ठगी: नटवरलाल है अनुराग... पहले बैंक मैनेजर बना फिर फाइनेंस अफसर, किया 120 करोड़ का खेल
Wed, 19 Jun 2024 08:52 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 19 Jun 2024 08:52 AM IST
सार
एकेटीयू से 120 करोड़ रुपये की ठगी मामले में आरोपी अनुराग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी पहले बैंक मैनेजर बना फिर फाइनेंस अफसर बन गया। आरोपी भोजपुरी फिल्म में बतौर प्रोड्यूसर काम कर चुका है। उसी के जरिए गुजरात के आरोपी जुड़े थे।
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aktu
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एकेटीयू से 120 करोड़ रुपये की ठगी को बहुत ही शातिर तरीके से अंजाम दिया गया। मास्टरमाइंड अनुराग श्रीवास्तव बड़ा नटवरलाल है। उसने पहले बैंक मैनेजर बनकर एकेटीयू प्रशासन से संपर्क किया। फिर एकेटीयू का फाइनेंस अफसर बताकर बैंक प्रशासन को झांसा दिया।
दोनों संस्थानों को फर्जी आईडी से ई मेल किया। न तो बैंक और न ही एकेटीयू प्रशासन उसके फर्जीवाड़े को जान पाए। चंद दिनों में उसने इतनी बड़ी रकम पार कर दी। साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने बताया कि आरोपी अनुराग श्रीवास्तव ने खुद को यूनियन बैंक का ब्रांच मैनेजर बताकर एकेटीयू के अफसरों से मुलाकात की।
इस दौरान उसने ब्रांच मैनेजर के नाम से फर्जी विजिटिंग कार्ड का भी इस्तेमाल किया। अफसरों को एफडी के बारे में जानकारी दी। अफसर एफडी के लिए राजी हो गए। 3 जून को उसने एकेटीयू का एक फर्जी अकाउंट यूनियन बैंक में खुलवाया। जिसका वह खुद संचालन कर रहा था।
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उसने ubin0803448@unionbanks.co.in से एकेटीयू को ई मेल भेजा। इसके बाद एकेटीयू ने 120 करोड़ रुपये एफडी के लिए एसबीआई से यूनियन बैंक ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद अनुराग ने फाइनेंस अफसर बनकर fo@aktu.ac.in आईडी से यूनियन बैंक को ईमेल कर 120 करोड़ की रकम एकेटीयू वाले अपने फर्जी खाते में ट्रांसफर करवा ली।
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दोनों संस्थानों को फर्जी आईडी से ई मेल किया। न तो बैंक और न ही एकेटीयू प्रशासन उसके फर्जीवाड़े को जान पाए। चंद दिनों में उसने इतनी बड़ी रकम पार कर दी। साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने बताया कि आरोपी अनुराग श्रीवास्तव ने खुद को यूनियन बैंक का ब्रांच मैनेजर बताकर एकेटीयू के अफसरों से मुलाकात की।
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इस दौरान उसने ब्रांच मैनेजर के नाम से फर्जी विजिटिंग कार्ड का भी इस्तेमाल किया। अफसरों को एफडी के बारे में जानकारी दी। अफसर एफडी के लिए राजी हो गए। 3 जून को उसने एकेटीयू का एक फर्जी अकाउंट यूनियन बैंक में खुलवाया। जिसका वह खुद संचालन कर रहा था।
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उसने ubin0803448@unionbanks.co.in से एकेटीयू को ई मेल भेजा। इसके बाद एकेटीयू ने 120 करोड़ रुपये एफडी के लिए एसबीआई से यूनियन बैंक ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद अनुराग ने फाइनेंस अफसर बनकर fo@aktu.ac.in आईडी से यूनियन बैंक को ईमेल कर 120 करोड़ की रकम एकेटीयू वाले अपने फर्जी खाते में ट्रांसफर करवा ली।
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री कनेक्शन, इसलिए साथी भी फंसे
इंस्पेक्टर ने बताया कि आरोपी राजेश बाबू भोजपुरी की फिल्म दबंग दामाद में बतौर प्रोड्यूसर काम कर चुका था। उसी दौरान उसकी मुलाकात पटेल उदय से हुई। इधर राजेश और अनुराग समेत अन्य साथी इसी बड़ी ठगी को अंजाम देने की तैयारी में थे। तब सभी ने मिलकर एकेटीयू को निशाना बनाने की साजिश रची। चूंकि रकम बड़ी थी इसलिए ट्रस्ट के खाते का इस्तेमाल किया।
इंस्पेक्टर ने बताया कि आरोपी राजेश बाबू भोजपुरी की फिल्म दबंग दामाद में बतौर प्रोड्यूसर काम कर चुका था। उसी दौरान उसकी मुलाकात पटेल उदय से हुई। इधर राजेश और अनुराग समेत अन्य साथी इसी बड़ी ठगी को अंजाम देने की तैयारी में थे। तब सभी ने मिलकर एकेटीयू को निशाना बनाने की साजिश रची। चूंकि रकम बड़ी थी इसलिए ट्रस्ट के खाते का इस्तेमाल किया।
पुलिस के मुताबिक जोशी देवेंद्र ट्रस्टी है। वहीं पटेल के खाते में एक करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर की गई। इसलिए ये दोनों आरोपी बनाए गए। अनुराग के अलावा अन्य चार आरोपियों ने तमाम तरह के फर्जी दस्तावेज तैयार किए। साजिश में शामिल रहे। कुछ रकम इन लोगों के भी खाते में आई। इसलिए इन सभी को भी आरोपी बनाया गया। गिरफ्तार आरोपी शैलेश कुमार रघुवंशी ठेकेदार है। कई फर्जीवाड़ों में वह शामिल रहा है।
लग्जरी कार खरीद कर घूमने गए नैनीताल
ट्रस्ट के जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई, उसमें नेट बैंकिंग एक्टिव नहीं थी। इसलिए रकम ट्रांसफर नहीं कर सके थे। सिर्फ एक करोड़ रुपये ही निकाल सके थे। इससे एक ग्रांड विटारा एसयूवी खरीदी। सभी लोग नैनीताल घूमने गए और रकम खर्च की।
ट्रस्ट के जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई, उसमें नेट बैंकिंग एक्टिव नहीं थी। इसलिए रकम ट्रांसफर नहीं कर सके थे। सिर्फ एक करोड़ रुपये ही निकाल सके थे। इससे एक ग्रांड विटारा एसयूवी खरीदी। सभी लोग नैनीताल घूमने गए और रकम खर्च की।
300 करोड़ की एफडी कराने की हुई थी बात
दरअसल, एकेटीयू से 300 करोड़ रुपये की एफडी कराने की बात तय हुई थी। शुरुआत में 120 करोड़ ही ट्रांसफर किए थे। आगे के दिनों में 180 करोड़ रुपये और विवि की तरफ से ट्रांसफर किए जाने थे। लेकिन, बैंक मैनेजर ने उसके पहले ही पुलिस को जानकारी देकर साजिश को नाकाम करवा दिया।
दरअसल, एकेटीयू से 300 करोड़ रुपये की एफडी कराने की बात तय हुई थी। शुरुआत में 120 करोड़ ही ट्रांसफर किए थे। आगे के दिनों में 180 करोड़ रुपये और विवि की तरफ से ट्रांसफर किए जाने थे। लेकिन, बैंक मैनेजर ने उसके पहले ही पुलिस को जानकारी देकर साजिश को नाकाम करवा दिया।
सबसे बड़ा सवाल...आखिर विवि की गोपनीय जानकारी ठगों तक कैसे पहुंची
ठगी को अंजाम देने वाले शातिरों को विवि की गोपनीय जानकारी थी। उनको पता था कि विवि समय-समय पर बड़ी रकम की एफडी करवाता है। इसलिए उसी को निशाना बनाया। अब सवाल है कि आखिर उनको इसकी जानकारी कैसे हुई? इस पहलू पर पुलिस तफ्तीश कर रही है। इसमें दो आशंकाएं हैं, पहली ये कि या तो बैंक का कोई कर्मचारी इसमें संलिप्त है या फिर विवि प्रशासन का। अनुराग की गिरफ्तारी के बाद बड़े खुलासे हो सकते हैं।
ठगी को अंजाम देने वाले शातिरों को विवि की गोपनीय जानकारी थी। उनको पता था कि विवि समय-समय पर बड़ी रकम की एफडी करवाता है। इसलिए उसी को निशाना बनाया। अब सवाल है कि आखिर उनको इसकी जानकारी कैसे हुई? इस पहलू पर पुलिस तफ्तीश कर रही है। इसमें दो आशंकाएं हैं, पहली ये कि या तो बैंक का कोई कर्मचारी इसमें संलिप्त है या फिर विवि प्रशासन का। अनुराग की गिरफ्तारी के बाद बड़े खुलासे हो सकते हैं।