सावधान: बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड अब अपराधियों के निशाने पर
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बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड भी साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। पिछले दिनों ऐसे कई मामले सामने आए, जब इन्हें हैक करने की कोशिश की गई।
ऐसे में यूपी पुलिस और एसटीएफ के लिए बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है। यह बात यहां साइबर क्राइम पर आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप के अंतिम दिन रविवार को सामने आई।
नाबार्ड के जीएम डॉ. श्याम गर्ग ने भी माना कि बैंकों के सामने साइबर अपराधियों से बचना सबसे बड़ी चुनौती है। आजकल इंटरनेट और ऑनलाइन प्रोसेस के जरिये ही अधिकतर ट्रांजेक्शन किए जाते हैं।
बैंक अधिक-अधिक से ग्राहकों तक पहुंचने के लिए नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में खतरा बढ़ता जा रहा है। एसटीएफ के एएसपी राजेश साहनी ने पुलिस की साइबर क्राइम सेल को बताया कि किस तरह मौका-ए-वारदात पर जाकर साइबर क्राइम से जुड़े सुबूत जुटाए जा सकते हैं।
एसटीएफ के एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि फाइनेंशियल फ्रॉड और मोबाइल-इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में सिर्फ समझदारी और जागरूकता से ही साइबर अपराध की घटनाएं कम हो सकती हैं।
वक्ताओं का कहना था कि साइबर अपराधियों का निशाना सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग बन रहे हैं। साइबर अपराधी आसानी से उन्हें बातों में उलझाकर पिन कोड व अन्य जानकारियां लेकर हजारों-लाखों रुपये का चूना लगा देते हैं।
कई कॉल सेंटरों को एसटीएफ की टीम ने पकड़ा
नोएडा, दिल्ली से लेकर बिहार और झारखंड में कॉल सेंटर खोलकर साइबर अपराधी ठगी की दुकान चला रहे हैं। ऐसे कई कॉल सेंटरों को एसटीएफ की टीम ने पकड़ा।
एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आजकल सभी कंपनियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन हो चुका है। सरकारी वेबसाइट तक हैक हो जा रही हैं।
पुलिस विभाग को भी प्राइवेट साइबर एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ रही है। ऐसे में युवाओं के लिए साइबर सिक्योरिटी और रिसर्च के क्षेत्र में संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने इससे जुड़े कई पाठ्यक्रमों के बारे में बताया जिनकी डिमांड पूरी दुनिया में बढ़ती जा रही है।
डॉ. त्रिवेणी सिंह और राजेश साहनी ने बताया कि कंप्यूटर और लैपटॉप अब गुजरे जमाने की बात हो जाएंगे। आने वाले समय में रैसबेरी उसकी जगह लेंगे। मोबाइल फोन के बराबर इस डिवाइस में एक कंप्यूटर की जितनी क्षमताएं होती हैं।