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Lucknow News: विरासत बचाने के लिए युवाओं में जिज्ञासा जरूरी
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पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम का शुभारंभ करते पद्मश्री डॉ नारायण व्यास।
लखनऊ। हमारे पूर्वजों की समृद्ध धरोहरें आज भी हमारे आसपास अलग-अलग रूपों में मौजूद हैं। इन्हें पहचानने, समझने और इनके ऐतिहासिक महत्व को जानने के लिए इतिहास और पुरातत्व एक-दूसरे के पूरक विषय हैं। विद्यार्थियों को अपने आसपास मौजूद प्राचीन स्थलों, स्मारकों, पुरावशेषों और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जिज्ञासा विकसित करनी चाहिए। ये बातें पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास ने बृहस्पतिवार को राज्य पुरातत्व निदेशालय में 13 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कही।
उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण केवल सरकार या पुरातत्व विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है। समाज और खासकर युवा पीढ़ी की सहभागिता से ही सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने बच्चों और विद्यार्थियों में पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
150 से अधिक प्रतिभागी जुड़े
उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय, संस्कृति विभाग की ओर से 20 अगस्त से तीन सितंबर तक 13 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। छतर मंजिल परिसर, कैसरबाग स्थित पुरातत्व निदेशालय के सभागार में हुए शुभारंभ कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष और 50 से अधिक ने ऑनलाइन सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. किरन कुमार थपल्याल ने की।
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पाषाण युग से कोणार्क तक समझेंगे विरासत
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि पाठ्यक्रम में पाषाण उपकरणों से धातु तक प्रागैतिहासिक संस्कृतियों के विकास, प्राचीन ईंट निर्मित संरचनाओं और पुरावशेष एवं स्मारक संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर विशेषज्ञ व्याख्यान होंगे। सरस्वती-सिंधु सभ्यता, भारतीय ज्ञान परंपरा, सिक्कों के ऐतिहासिक चलन, गुजरात के संरक्षित स्मारकों, सिरपुर के पुरातात्विक महत्व तथा कोणार्क की मूर्तिकला और अधूरे स्थापत्य पर भी सत्र होंगे। इसके अलावा स्तूप संरक्षण, आपातकालीन संरक्षण और सैल्वेज ऑपरेशन की प्रक्रिया भी समझाई जाएगी।
डॉ. अनिल कुमार, इंदु प्रकाश, डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. नीरज राय, डॉ. नरेंद्र परमार, डॉ. विजय माथुर, डॉ. दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव, साधना व्यास, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार मिश्रा, डॉ. राजीव द्विवेदी और पद्मश्री डॉ. बीआर मणि समेत कई विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। विभिन्न सत्रों में डेमोंस्ट्रेशन भी होंगे। 3 सितंबर को प्रमाणपत्र वितरण के साथ पाठ्यक्रम का समापन होगा।
जानिए पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास को
पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास उज्जैन, मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ पुरातत्वविद् और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व अधीक्षक हैं। पुरातत्व, शैलचित्रों के अध्ययन और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2026 में प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा है। उन्होंने भीमबेटका, सांची और रानी की वाव जैसे ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण केवल सरकार या पुरातत्व विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है। समाज और खासकर युवा पीढ़ी की सहभागिता से ही सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने बच्चों और विद्यार्थियों में पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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150 से अधिक प्रतिभागी जुड़े
उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय, संस्कृति विभाग की ओर से 20 अगस्त से तीन सितंबर तक 13 दिवसीय पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। छतर मंजिल परिसर, कैसरबाग स्थित पुरातत्व निदेशालय के सभागार में हुए शुभारंभ कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष और 50 से अधिक ने ऑनलाइन सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. किरन कुमार थपल्याल ने की।
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पाषाण युग से कोणार्क तक समझेंगे विरासत
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि पाठ्यक्रम में पाषाण उपकरणों से धातु तक प्रागैतिहासिक संस्कृतियों के विकास, प्राचीन ईंट निर्मित संरचनाओं और पुरावशेष एवं स्मारक संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर विशेषज्ञ व्याख्यान होंगे। सरस्वती-सिंधु सभ्यता, भारतीय ज्ञान परंपरा, सिक्कों के ऐतिहासिक चलन, गुजरात के संरक्षित स्मारकों, सिरपुर के पुरातात्विक महत्व तथा कोणार्क की मूर्तिकला और अधूरे स्थापत्य पर भी सत्र होंगे। इसके अलावा स्तूप संरक्षण, आपातकालीन संरक्षण और सैल्वेज ऑपरेशन की प्रक्रिया भी समझाई जाएगी।
डॉ. अनिल कुमार, इंदु प्रकाश, डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. नीरज राय, डॉ. नरेंद्र परमार, डॉ. विजय माथुर, डॉ. दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव, साधना व्यास, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार मिश्रा, डॉ. राजीव द्विवेदी और पद्मश्री डॉ. बीआर मणि समेत कई विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। विभिन्न सत्रों में डेमोंस्ट्रेशन भी होंगे। 3 सितंबर को प्रमाणपत्र वितरण के साथ पाठ्यक्रम का समापन होगा।
जानिए पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास को
पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास उज्जैन, मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ पुरातत्वविद् और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व अधीक्षक हैं। पुरातत्व, शैलचित्रों के अध्ययन और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2026 में प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा है। उन्होंने भीमबेटका, सांची और रानी की वाव जैसे ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।