{"_id":"62a44f7b09f37f2c657c491e","slug":"up-government-removes-the-condition-of-60-years-age-bar-for-releasing-prisoner","type":"story","status":"publish","title_hn":"Big decision: कैदियों की समय पूर्व रिहाई के लिए शासन ने दी रियायत, 60 वर्ष की आयु पूरी होने की शर्त हटाई गई","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
Big decision: कैदियों की समय पूर्व रिहाई के लिए शासन ने दी रियायत, 60 वर्ष की आयु पूरी होने की शर्त हटाई गई
Sat, 11 Jun 2022 01:46 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 11 Jun 2022 01:46 PM IST
सार
यूपी शासन ने सजायाफ्ता कैदियों की समय पूर्व रिहाई के लिए रियायत दी है। अब 60 वर्ष की आयु पूरी करने की शर्त हटा दी गई है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश शासन ने सजायाफ्ता कैदियों की समय पूर्व रिहाई के लिए पहले के नियमों में संशोधन करने का फैसला किया है। अब शिक्षक दिवस, अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर भी शर्तों के साथ रिहाई हो सकेगी। पहले गणतंत्र दिवस, महिला, विश्व स्वास्थ्य, मजदूर, विश्व योग व स्वतंत्रता दिवस समेत गांधी जयंती के मौके पर इस रिहाई का प्राविधान था।
विज्ञापन
अपर मुख्य सचिव कारागार प्रशासन एवं सुधार अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि पूर्व की नीति में संशोधन किया गया है। इसमें जिन बंदियों ने 16 वर्ष की अपरिहार और 20 वर्ष की सपरिहार सजा पूरी की हो, उसे प्रतिबंधित श्रेणी से बाहर रहने पर रिहाई के लिए उपयुक्त माना जाएगा। पहले की 60 वर्ष की आयु पूरी करने की शर्त हटा ली गई है।
विज्ञापन
संशोधित नीति में एक बिंदु जोड़ा गया है, जिसमें स्थायी नीति के तहत आजीवन कारावास की सजा से दंडित सिद्घदोष बंदी, जिनकी समय पूर्व रिहाई से लोक व्यवस्था व जनहित प्रभावित हो सकता है, की रिहाई का प्रस्ताव समिति द्वारा निरस्त कर दिया जाएगा। प्रतिबंधित शर्तों में 16 बिंदु हैं। इनमें से कोई भी बिंदु कैदी पर लागू होने की दशा में रिहाई नहीं मिलेगी।
विज्ञापन
क्या है अपरिहार सजा और सपरिहार सजा
दरअसल, हर सजायाफ्ता कैदी को प्रत्येक महीने की सजा में छह दिन की छूट मिलती है। चाल चलन ठीक होने पर यह छूट सात दिनों तक भी दी जाती है। छूट की अवधि घटाकर गणना करने को अपरिहार और छूट की अवधि जोड़ने को सपरिहार कहते हैं।