लाखों को ठगने वाला ये शातिर कभी था 'हीरो'!
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भोपाल रेलवे भर्ती बोर्ड की दो साइटें हैं। एक असली और दूसरी नकली। नकली साइट (www.rrbbpl.org) देखने में पहली से भी ज्यादा अच्छी लगती है।
इस पर एक भर्ती की सूचना दी गई। जॉब की तलाश में घूम रहे लाखों बेरोजगारों ने इस पर अप्लाई कर दिया। फिर शुरू हुआ फर्जीवाड़ा।
एक ऐसा खेल, जो खुलेआम नेट की दुनिया में खेला जा रहा था और जिसका मास्टर माइंड कोई और नहीं बल्कि एक ऐसा शख्स था, जिसे पूर्व राष्ट्रपति ने उसकी काबिलियत के लिए सम्मानित किया था।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो मास्टर माइंड शिवेंदु माधव की भी तलाश शुरू हुई, आखिरकार बुधवार को उसे यूपी एसटीएफ की टीम ने लखनऊ से ही गिरफ्तार कर लिया।
होगी पूरे गिरोह की गिरफ्तारी
शिवेंदु माधव की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ के हौंसले बुलंद हो गए हैं। एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही पूरे गैंग का पर्दाफाश कर दिया जाएगा। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि एक दो दिनों में माधव के कुछ अन्य साथियों की गिरफ्तारी भी कर ली जाएगी।
फिलवक्त एसटीएफ की टीम यह पड़ताल करने में जुटी है कि शिवेंदु ने इतने बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम कैसे दिया। जांच टीम उसके तौर-तरीकों और माध्यमों की भी जानकारी जुटा रही है।
पता यह भी चला है कि भोपाल रेवले भर्ती बोर्ड की जो फर्जी वेबसाइट माधव ने तैयार की थी, उसे भी उसने नागेंद्र कुमार के नाम से ही बनवाया था। नागेंद्र भोपाल रेलवे भर्ती बोर्ड के प्रमुख हैं।
एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक, शिवेंदु के साथ इस पूरे फर्जीवाड़े की प्लानिंग बनाने और अंजाम देने में बनारस के एक विपिन पाठक नाम के युवक शामिल था, जिसकी तलाश जारी है।
एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था सम्मान
कुछ साल पहले एक मौका देश के लिए गर्व का पल था। बिहार के सीवान जिले से निकला टेकी शिवेंदु तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से सम्मानित हो रहा था। पटना में लगी एक साइंस एग्जीबिशन में कलाम उसकी तारीफ कर रहे थे, तो पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा हो रहा था।
उसने गूगल की तर्ज पर एक सर्च इंजन बनाकर पूरे देश के युवाओं में जोश भर दिया था और उसकी चर्चा एक होनहार भविष्य के रूप में हर तरफ हो रही थी।
एसटीएफ से मिली जानकारी के मुताबिक, माधव ने हाल ही में अपने फेमस ब्लॉग को 4.5 लाख रुपये में एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी के नामी प्रोफेसर को बेच दिया था।
उसकी दो अन्य वेबसाइट www.cozli.com और www.technozeast.com हैं। माधव के बारे में अक्सर डिजिट मैग्जीन पर लिखा जाता रहा है।