सुसाइड: सॉरी पापा, हम कुछ नहीं कर सके इसलिए दुनिया से जा रहे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘पापा, आई एम सॉरी। हम कुछ कर नहीं सके इसलिए दुनिया से जा रहे हैं।’ सुसाइड नोट में यह लिखकर महानगर स्थित पीएसी की 35वीं वाहिनी के नायक मो. जहांदार आलम की 22 वर्षीय बेटी मोहिसिना बानो ने फांसी लगाकर जान दे दी। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी लेकिन छह अप्रैल को आयोजित परीक्षा गड़बड़ होने से काफी परेशान थी।
इंस्पेक्टर विकास पांडेय ने बताया कि मोहिसिना के परिवार में पिता के अलावा मां शकीला, केंद्रीय विद्यालय में इंटर की पढ़ाई कर रही छोटी बहन मारिया और छोटा भाई मेराज हैं। मेराज मंदबुद्धि है। बृहस्पतिवार सुबह पिता ड्यूटी पर गए थे जबकि मां किसी काम से वायरलेस के ऑफिस व मारिया स्कूल गई थी।
मोहिसिना अपने छोटे भाई के साथ घर पर अकेली थी। दोपहर में मारिया स्कूल से लौटी तो दरवाजा खुला हुआ था। वह भीतर पहुंची तो टॉयलेट के रोशनदान में दुपट्टे से बहन का शव लटका देखकर होश उड़ गए। मारिया से सूचना पाकर मो. जहांदार व आसपास के लोग एकत्र हो गए।
महानगर पुलिस को मोहिसिना के पास से सुसाइड नोट मिला है जिसमें उसने पिता से माफी मांगी है। उसने लिखा कि ममेरे और चचेरे भाई पढ़-लिखकर कामयाब हो गए पर हम कुछ नहीं कर सके। परिवारीजनों ने बताया कि मो. जहांदार ने अपने परिवार के कई बच्चों की पढ़ाई-लिखाई कराई है।
उनकी वजह से ही कई बच्चे आज अच्छी नौकरी कर रहे हैं। मोहिसिना भी पढ़-लिखकर कामयाब होना चाहती थी। वह नीट की तैयारी कर रही थी। छह अप्रैल को उसने प्रतियोगी परीक्षा का पेपर दिया था जो कुछ गड़बड़ हो गया। इसके बाद से वह काफी परेशान रहती थी। परिवारीजनों ने समझाने की कोशिश की लेकिन वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी। इसी के चलते उसने खुदकुशी कर ली।
दान कर दी आंखें
मोहिसिना के परिवारीजनों ने उसकी दोनों आंखें दान कर दी हैं। मो. जहांदार ने कहा कि बेटी दुनिया से चली गई लेकिन उसकी आंखों के जरिए किसी की जिंदगी रोशन हो सकेगी तो दिल को कुछ सुकून रहेगा। ऐसा लगेगा कि बेटी अब भी किसी न किसी रूप में परिवार के लोगों को देख रही है।