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दरिंदा बन गया बेटा, मां को मार घर में ही गाड़ा!

Fri, 12 Sep 2014 06:46 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 12 Sep 2014 06:46 PM IST
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son kills his mother in sitapur.

उसके मुस्कुराने पर वह भी खिलखिला उठती थी। जब उसके आंसू फूटते, तो वो भी रो दिया करती थी। उसके हर दर्द को अपना समझने वाली मां, उसे दुनिया की हर बला से महफूज रखने वाली मां के साथ वो ऐसे सुलूक भी करेगा, उसने कभी सोचा भी नहीं था।

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पिता के बाद दुनिया की हर मुसीबत से बचाकर मां ने जिस बेटे को पाला था, उसी ने मां का बेरहमी से कत्ल कर दिया।

वजह सिर्फ यह थी कि वह छोटे भाई से हुए करार के तहत मां को खाना देने से बचना चाहता था। दुनिया के सबसे पहले और अहम रिश्ते को शर्मसार करने वाले इस मामले मामला फिर उत्तर प्रदेश का ही है।

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की बेटी और दोनों बेटों की शादी

son kills his mother in sitapur.

यह घटना राजधानी लखनऊ सीतापुर जिल के सकरन थाना क्षेत्र के ग्राम नेवादा में देखने को मिली। गांव के रामदयाल व रामदेई के दो पुत्र बुद्धा व रामजीवन हैं। दो बच्चों को रामदेई ने बड़े ही लाड प्यार से पाला।

खुद भूखी रह कर उसने दोनों बच्चों का पेट पाला। परवरिश के दौरान ही राम दयाल की मृत्यु हो गई, बावजूद इसके रामदेई ने दोनों भाई व एक पुत्री के पालन पोषण में कोई कमी नहीं रखी। कभी बच्चों को बोझ नहीं समझा।

उसे उम्मीद थी कि बच्चे बड़े होकर उसका सहारा बनेंगे। सबको हर वक्त आगे तरक्की करने का सम्बल दिया। समय बीता तो रामदेई ने पुत्री व दोनों पुत्रों का विवाह कर दिया।

मां को पालने के लिए बच्चों ने की 'डील'

son kills his mother in sitapur.

वक्त इस कदर बीता कि रामदेई 80 वर्ष की हो गई। उसके अपने ही पुत्र उसे बोझ समझने लगे। गांव के लोगों को पता चला तो पंचायत हुई और यह फैसला लिया कि छह माह रामदेई अपने बड़े पुत्र बुद्धा के घर तो छह माह छोटे पुत्र रामजीवन के घर रहेगी।

इस दौरान पुत्र उसके खाने, कपड़े व दवा का इंतजाम करेंगे। छोटा भाई रामजीवन फैसले पर पूरी तरह से खरा उतरा। उसने पंचायत के फैसले के अनुसार पहले ही छह माह अपनी मां रामदेई को घर रखा।

छह माह बीता तो रामदेई इस उम्मीद से बुद्धा के घर गई कि अब बड़ा बेटा उसकी सब सुविधाओं का ध्यान रखेगा। पर रामदेई का यह सोचना बिल्कुल गलत था।

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मां को मार घर में ही दफनाया

son kills his mother in sitapur.

बूढ़ी रामदेई का पुत्र बुद्धा के घर में कदम रखना मौत के घर में कदम रखना साबित हुआ। पुत्र बुद्धा इस कदर निर्दयी हो चुका था कि उसने कमजोर, लाचार व बेबस हो चुकी बूढ़ी मां का गला घोटने में जरा भी संकोच न किया।

रिश्तों को तार तार करते हुए बुद्धा ने मां की हत्या कर दी। इसके बाद उसे घर के एक कोने में दफना भी दिया।

यह तो छोटे पुत्र रामजीवन की चिंता ही थी, जिसने मां की खोज शुरू की और हत्या की घटना से पर्दा उठ गया। आज रामदेई का शव उसी घर के आंगन में पड़ा था, जहां उसने बहू बनकर कदम रखा था।

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