धरा गया तस्करी का बड़ा गुर्गा, करोड़ों का माल बरामद!
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फैजाबाद रोड पर रामस्वरूप मेमोरियल इंजीनियरिंग कॉलेज के पास बृहस्पतिवार रात क्राइम ब्रांच की टीम ने बाराबंकी के कुख्यात ड्रग तस्कर अज्जन उर्फ मिस्बाह-उर-रहमान को दबोच लिया। वह स्कार्पियो कार से हेरोइन की डिलीवरी देने कानपुर जा रहा था।
उसके पास से दो किलो हेरोइन, एक पिस्टल और पांच कारतूस तथा दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। एसएसपी यशस्वी यादव ने बताया कि अज्जन ड्रग्स के साथ अवैध असलहों की खरीद-फरोख्त का धंधा भी कर रहा था। उसके खिलाफ चिनहट कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है।
एसएसपी ने बताया कि बाराबंकी के जैदपुर स्थित टिकरा मुर्तजा गांव निवासी अज्जन के बारे में सूचना मिलने के बाद क्राइम ब्रांच के एएसपी दिनेश कुमार सिंह को उसके पीछे लगाया गया था। वह जैदपुर थाना का हिस्ट्रीशीटर है और गैंग बनाकर काम करता है।
अज्जन के खिलाफ बाराबंकी के जैदपुर थाना में हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं के 21 मामले दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि अज्जन दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, मुंबई, कोलकाता, बिहार में ड्रग्स की थोक सप्लाई तथा बाराबंकी, सीतापुर, कानपुर, लखनऊ सहित अन्य जनपदों में खुदरा बिक्री करता है।
तीन पीढ़ियां कर रहीं ड्रग्स का कारोबार
इन जनपदों में अज्जन का संपर्क छोटे-छोटे कई ड्रग तस्करों से हैं जो गली-मुहल्लों, बस व रेलवे स्टेशन के आसपास पुड़िया बेचते हैं। एसएसपी ने बताया कि अज्जन की लंबे समय से सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स को तलाश थी लेकिन वह घर से बहुत ही कम निकलता था इसलिए उसे पकड़ा नहीं जा सका था।
उन्होंने बताया कि हेरोइन या अन्य मादक पदार्थ लेने के लिए लोग खुद ही उसके पास बाराबंकी जाते हैं। कानपुर में उसे रिश्तेदार से मिलने जाना था इसलिए उसने डिलीवरी के लिए हेरोइन का पैकेट भी ले लिया। एसएसपी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हेरोइन की कीमत करीब दो करोड़ रुपये है।
अज्जन से पूछताछ में अहम जानकारियां मिली हैं जिन पर काम कराया जा रहा है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह, दरोगा फजलुर्रहमान, सिपाही मो. कलीम, मो. शरीफ, रूपेंद्र शर्मा थे। एसएसपी ने क्राइम ब्रांच की टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
एसएसपी ने बताया कि अज्जन की तीन पीढ़ियां ड्रग्स का कारोबार कर रही हैं। उसके पिता मो. कलीम अब भी इस कारोबार में लिप्त हैं जबकि बाबा भी ड्रग्स की खरीद-फरोख्त करते थे। अज्जन ने ड्रग्स के कारोबार को गैंग बनाकर आगे बढ़ाया।
अपने प्रतिद्वंद्वियों को गिरफ्तार कराकर या मरवाकर इस धंधे में वर्चस्व कायम कर लिया था। उसके गैंग में बाराबंकी के टिकरा उसमा गांव का मो. मेराज, टिकरा मुर्तजा गांव का एहतेशान, मुरलीगंज का मो. जाकिर सहित अन्य सदस्य हैं जिनकी तलाश की जा रही है।
रोज 80 हजार की कमाई, सौ करोड़ का टर्नओवर
एएसपी क्राइम ने बताया कि अज्जन ने पूछताछ में रोज 80 हजार रुपये की कमाई की जानकारी दी है। उसने पुलिस को बताया है कि उत्तर भारत के अधिकांश शहरों में उसकी ही हेरोइन सप्लाई होती है।
रेव पार्टियां, क्लब और लाउंज में भी उसे बड़े आर्डर मिलते हैं। इस बिजनेस में उसका टर्नओवर सौ करोड़ के करीब है। एएसपी क्राइम का कहना है कि बाराबंकी के टिकरा उसमा और टिकरा मुर्तजा गांव में सालाना 1500 करोड़ की हेरोइन की खरीद-फरोख्त होती है।
रामनगर, सफदरगंज, चंदोली, फतेहपुर, टेरा कलां, भनऊ, बरोली मलिक, मरियरपुर और बसा शरीफ गांव में भी हर साल एक से पचास करोड़ का ड्रग्स का कारोबार होता है।
ड्रग्स तस्करों को है खाकी और खादी का सरंक्षण
बाराबंकी के ड्रग्स तस्करों को खाकी-खादी का संरक्षण मिला है। पहले बीजेपी फिर बसपा में रहे नवाबगंज के एक विधायक ड्रग तस्करों से संबंध को लेकर खूब चर्चा में रहे। जैदपुर थाना में पोस्ट होने वाले थानेदार की कमाई सालाना एक करोड़ रुपये रुपये मानी जाती है इसलिए यहां के लिए खूब जुगाड़ और सिफारिश चलती है।
पुलिस से बचने को गांव में बनी हैं सुरंगें
कुछ ड्रग तस्करों का माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव से सीधा संपर्क है। एएसपी क्राइम ने बताया कि एक ड्रग तस्कर मालती वर्मा तो खादी के संरक्षण के चलते ही दरियापुर गांव की प्रधान बन गई थी।
मन्नान, जबीर, अबसर जैसे ड्रग तस्करों के संबंध कई नेताओं से हैं जो ड्रग डीलिंग में इनकी मदद करते हैं।
पुलिस और नारकोटिक्स अफसरों के लिए गांव में घुसकर ड्रग तस्करों को पकड़ना मुश्किल काम है। तस्करों ने बाराबंकी से गांव जाने वाले रास्तों पर अपने मुखबिर फैला रखे हैं। यह लोग गांव की तरफ आने वाली हर गाड़ी का पीछा करके एक-एक सूचना मोबाइल फोन से देते रहते हैं।
अगर किसी टीम ने गांव पहुंचकर दबिश भी दे दी तो भी तस्करों को पकड़ा नहीं जा सकता। एएसपी क्राइम ने बताया कि तस्करों ने गांव के घरों को सुरंग बनाकर एक-दूसरे से जोड़ दिया है। इन्हीं सुरंगों से वह भाग जाते हैं।