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गायत्री प्रजापति पर नाबालिग से रेप के प्रयास का भी चलेगा केस

Wed, 19 Jul 2017 12:16 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 19 Jul 2017 12:16 AM IST
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pocso court framed charges against 7 people including gayatri prajapati
गायत्री प्रसाद प्रजापति - फोटो : amar ujala

पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ चित्रकूट की महिला से गैंगरेप के साथ ही नाबालिग से दुराचार के प्रयास का केस भी चलेगा। पाक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश उमाशंकर शर्मा ने मंगलवार को गायत्री के साथ ही विकास वर्मा, आशीष शुक्ला, अशोक तिवारी, अमरेंद्र सिंह, चंद्रपाल व रूमेश्वर के खिलाफ आरोप तय कर दिए। कोर्ट ने इसके साथ ही आरोपियों की नाबालिग से रेप के प्रयास मुक्त करने की अर्जी खारिज कर दी।

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पूर्व मंत्री गायत्री, अशोक तिवारी, आशीष शुक्ला तथा विकास वर्मा के खिलाफ पाक्सो एक्ट के अलावा गैंगरेप, छेड़छाड़, गाली-गलौज व धमकी देने के आरोप तय किए गये हैं। वहीं अमरेंद्र सिंह, चंद्रपाल व रूपेश्वर पर गैंगरेप, छेड़छाड़, गाली देने व धमकी देने का आरोप तय किया गया है। कोर्ट ने मामले में गवाह पेश करने के लिए एक अगस्त की तारीख तय की है। इसके पहले कोर्ट ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति समेत सात आरोपियों की ओर से उन्हें आरोपों से मुक्त करने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी।
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कोर्ट ने पीड़िता के बयान का दिया हवाला
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि आरोपियों ने उसके साथ दुराचार किया। साथ ही उसकी नाबालिग पुत्री के साथ दुराचार की कोशिश की। वहीं पीड़िता की नाबालिग पुत्री के कलमबंद बयान से भी तथ्यों की पुष्टि हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग ने मंत्री आवास पर 6-7 लोग तथा एक मोटा आदमी के होने की पुष्टि की है।
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कोर्ट ने कहा कि नाबालिग ने कलमबंद बयान में कहा कि उसकी मां रो रही थी लेकिन उसके साथ किसी ने जबरदस्ती नहीं की। बाद में पुलिस को दिए बयान में उसने स्वीकार किया कि आरोपियों ने उसके साथ दुराचार किया।

मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य

pocso court framed charges against 7 people including gayatri prajapati

पीड़िता की शिकायत पर बदलना पड़ा था जांच अधिकारी
कोर्ट ने आरोपियों की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर यह देखा जाना चाहिए कि पर्याप्त साक्ष्य हैं या नहीं।

ऐसा नहीं हो सकता है कि कलमबंद बयान में बच्ची के बयान के आधार पर ही बच्ची के साथ हुए दुराचार के बिंदु को अस्वीकार कर दिया जाए। वह भी तब जबकि पीड़िता स्वयं के साथ सामूहिक दुराचार व बच्ची के साथ हुए दुराचार की पुष्टि कर रही है।

कोर्ट ने आगे कहा कि यह भी देखना होगा कि पीड़िता की ओर से पूर्व विवेचक के खिलाफ निष्पक्ष विवेचना को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। इसके चलते विवेचना दूसरे विवेचक को स्थानांतरित की गई।

बच्ची के कलमबंद बयान व पुलिस को दिए बयान को एक साथ देखना होगा जिसमें बच्ची ने अपने साथ विकास वर्मा, गायत्री प्रजापति, आशीष शुक्ला तथा अशोक तिवारी द्वारा दुराचार की बात कही है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उदाहरण देकर कहा कि मजबूत संदेह का साथ भी मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुई थी रिपोर्ट

pocso court framed charges against 7 people including gayatri prajapati

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गौतम पल्ली थाने में 18 फरवरी 2017 को पीड़िता की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़िता का मंत्री गायत्री प्रजापति के पास आना-जाना था।

मंत्री ने पीड़िता को अशोक तिवारी के जरिए मंत्री आवास पर बुलाया था। बालू का काम दिलाने का आश्वासन देकर उसके साथ दुराचार किया और अश्लील फोटो खींचे। बाद में यही फोटो दिखाकर एक महीने तक विधायक निवास में रखकर सामूहिक दुराचार किया।

यही नहीं पीड़िता की नाबालिग पुत्री के साथ भी दुराचार का प्रयास किया गया। पुलिस ने जांच के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। जिस पर मंगलवार को कोर्ट ने आरोपियों आरोप तय कर दिए।

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