संत ज्ञानेश्वर आश्रम के प्रधान सचिव की गोली मारकर हत्या!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोठी क्षेत्र में ग्राम रैसंडा स्थित संत ज्ञानेश्वर आश्रम के प्रधान सचिव की शुक्रवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के समय प्रधान सचिव आश्रम के अंदर ही सो रहे थे।
शनिवार सुबह घटना की जानकारी होने पर पहुंची पुलिस जांच-पड़ताल कर रही है। इस घटना में आश्रम के एक सेवादार की तहरीर पर पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है। वारदात के पीछे आश्रम की संपत्ति का विवाद बताया जा रहा है।
रैसंडा स्थित संत ज्ञानेश्वर पुरूषोत्तमधाम आश्रम के प्रधान सचिव रामसहाय सिंह (65) निवासी ग्राम पांडेयपुरवा कोतवाली नगर जनपद बनारस की शुक्रवार देर रात आश्रम परिसर के अंदर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक रात का खाना खाने के बाद रामसहाय आश्रम के ही खलिहान में तख्त पर सोए थे। शनिवार सुबह जब आश्रम के सेवादार उठे तो घटना की जानकारी हुई। प्रधान सचिव के सर में गोली लगी थी।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच-पड़ताल करने के साथ शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। इस वारदात में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। मालूम हो कि वर्ष 2005 में इलाहाबाद कुंभ से लौटते समय संत ज्ञानेश्वर की सनसनीखेज तरीके से ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी।
बदला लेने के लिए वारदात की आशंका
संत ज्ञानेश्वर की हत्या के बाद रामसहाय को आश्रम का प्रधान सचिव बनाया गया था। उसके बाद रैसंडा आश्रम में रहने वाले बिहार निवासी हरेराम चौधरी व प्रताप को रामसहाय ने आश्रम से निकाल दिया था।
इसके बाद से हरेराम आश्रम के बाहर एक छप्पर में अपने परिवार के साथ रहा था। इस वारदात के पीछे संत ज्ञानेश्वर के आश्रमों की संपत्ति बताई जा रही है। इसके चलते कई आश्रम में रहने वाले सेवादारों को ही नामजद किया गया है।
हरेराम चौधरी को घटना का मुख्य आरोपी बताया गया है। कहा जा रहा है कि उसने रामसहाय से बदला लेने के लिए यह वारदात की है।
हरेराम ने कुछ दिन पूर्व आश्रम के पास ही कुछ जमीन प्रताप के नाम खरीदी थी। लेकिन उस पर प्रताप का कब्जा नहीं था। भूमि आश्रम के कब्जे में थी।