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सियासी रार बनी बसपा नेता की हत्या का कारण
लखनऊ/निशांत कुमार यादव
Updated Mon, 30 Sep 2013 02:43 AM IST
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लगातार दो बार छावनी परिषद सदस्य रहे श्याम नारायन पांडे उर्फ पप्पू पांडे की हत्या के पीछे पुरानी दुश्मनी के साथ सियासी रार की बात भी सामने आ रही है।
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वार्ड संख्या छह से पिछला चुनाव हारने के बाद इस वर्ष दिसंबर में प्रस्तावित छावनी परिषद चुनाव में पप्पू पांडे ने पत्नी पूनम पांडे की दावेदारी पेश कर दी थी। जबकि इसी वार्ड से सीरियल किलर सलीम अपनी पत्नी अंजुम को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहा है।
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पप्पू पांडे की हत्या खबर छावनी के सदर बाजार सहित समूचे क्षेत्र में आग की तरह फैली। पप्पू पांडे की छवि छावनी के कद्दावर नेताओं के रूप में होती थी। बोर्ड बैठक में सैन्य प्रशासन को अपने प्रस्ताव पर अमल कराने के लिए पप्पू पांडे की नोंकझोक का सामना भी करना पड़ता था।
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पप्पू पांडे ने छावनी परिषद की राजनीति में सन 1992 में कदम रखा। वार्ड संख्या पांच से उस समय के प्रभावशाली नेता कमाल याकूब को हराया। इसके बाद 1997 में फिर इसी वार्ड से जीता। जबकि 2003 में छावनी परिषद के निर्वाचित सदन को भंग कर बैरी बोर्ड लागू कर दिया गया।
करीब पांच वर्ष तक बैरी बोर्ड के कार्यकाल के बाद मई 2008 में फिर से छावनी परिषद चुनाव का शंखनाद हुआ। इस बार पप्पू पांडे ने खुद वार्ड संख्या छह जबकि पत्नी पूनम पांडे को वार्ड संख्या सात से चुनाव मैदान में उतारा।
हालांकि पप्पू अपना तीसरा चुनाव मो. अशफाक कुरैशी से हारा जबकि पत्नी को सुमन वैश्य ने हराया। इस बार दिसंबर में प्रस्तावित छावनी परिषद चुनाव के लिए छह नंबर वार्ड लॉटरी के बाद महिला घोषित कर दिया गया।
इसी के साथ सियासी दुश्मनी शुरू हो गई। इसी वार्ड से पिछला चुनाव हारे पप्पू ने पत्नी को लड़ाने की घोषणा कर दी। इसी वार्ड में सीरियल किलर सलीम, रुस्तम और सोहराब का घर है।
यही नहीं सलीम अपनी पत्नी अंजुम को वार्ड छह से चुनाव लड़ाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार एक सप्ताह पहले तिहाड़ जेल से पेशी पर आए सलीम ने अपने साथियों के साथ पप्पू को रास्ते से हटाने की चर्चा भी की थी।
लालबत्ती ने बढ़ाया ग्लैमर
कैंट अधिनियम 2006 के तहत छावनी परिषद उपाध्यक्ष को लालबत्ती सरकारी कार की सुविधा और सदस्यों से अधिक अधिकार दिए गए हैं। वित्त कमेटी सहित सभी अहम कमेटी का चेयरमैन भी उपाध्यक्ष होता है।
नेताओं को दी धमकी
बीती पांच अगस्त को छावनी परिषद के उपाध्यक्ष के लिए हुए निर्वाचित सदन की वोटिंग के लिए सलीम ने तीन सदस्यों को जेल से ही फोन पर धमकी दी थी। सलीम ने एक महिला सदस्य के पक्ष में मतदान करने के लिए तीनों सदस्यों को धमकाया भी था। हालांकि बाद में सलीम किसी कारणवश इस मामले से दूर हो गया।
सेना ने किया था सतर्क
छावनी परिषद चुनाव के ठीक पहले हत्या होने की खबर सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस को भी लग गई थी। एक माह पहले सेना की खुफिया इकाई ने मध्य कमान मुख्यालय को भेजी रिपोर्ट में कहा था कि चुनाव के पहले वार्ड संख्या छह के उम्मीदवारों पर सीरियल किलर जानलेवा हमले करा सकते हैं।