‘सुपारी किलर’ का अपहरण, चार माह बाद मां ने लिखाई रिपोर्ट
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कैंट निवासी युवक संदिग्ध परिस्थितियों में घर से गायब हो गया। मां ने उसके ही साथियों पर अपहरण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई।
चार महीने पुराने इस मामले की पुलिस ने विवेचना शुरू की तो पता चला युवक ने फैजाबाद के एक व्यक्ति की हत्या की सुपारी ली थी।
रुपयों के लेन-देन को लेकर विवाद के बाद वारदात में शामिल साथी घर आए और युवक को बंधक बनाकर 50,000 रुपये मांगे। इसके बाद से युवक गायब है।
निलमथा के शारदानगर निवासी गुलशाद का कहना है कि 21 जुलाई को चार युवक घर आए और बेटे अकरम को बंधक बनाकर 50,000 रुपये की मांगे।
इसके बाद तीनों अकरम को साथ लेकर चले गए। काफी तलाश के बावजूद बेटे का पता नहीं चला।
गुलशाद ने कन्नौज के छिबरामऊ जगतपुर निवासी मोनू, इटावा के मजगांव में रहने वाले रत्नेश, कैंट के रजमन बाजार निवासी प्रमोद और अमरेश पर बेटे को बंधक बनाकर 50,000 रुपये मांगने और अपहरण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई।
पुलिस ने जांच शुरू की तो और ही कहानी सामने आई। पता चला कि अकरम के जीजा सरफराज फैजाबाद में रहते हैं।
कुछ माह पूर्व वह उनसे मिलने फैजाबाद गया था, जहां जीजा का दोस्त अमरेश मिला। पुलिस के मुताबिक अमरेश की मां को कोई भगाकर ले गया था।
जिसकी हत्या के लिए अमरेश ने सरफराज से किसी सुपारी किलर से संपर्क कराने को कहा था। सरफराज ने अकरम को हत्या के लिए राजी कर लिया।
बातचीत के बाद अकरम अपने साथी प्रमोद और मोनू को साथ लेकर फैजाबाद पहुंचा और हत्या कर दी।
हालांकि, काम होने के बाद अमरेश ने पूरा पैसा नहीं दिया। पुलिस का कहना है कि पैसा न मिलने पर अकरम उसकी बाइक उठा लाया।
अमरेश लखनऊ आया और अकरम के दोस्तों को साथ लेकर उसके घर पहुंचकर बाइक वापस मांगी। इस बात को लेकर झगड़ा हुआ, लेकिन आपस में बातचीत के बाद अकरम को साथ लेकर सभी इटावा चले गए।
उधर, फैजाबाद पुलिस ने इटावा से प्रमोद और मोनू को पकड़ लिया। प्रमोद जेल से छूट गया है लेकिन मोनू अब भी बंद है।
गुलशाद का कहना है कि हत्या की सुपारी प्रमोद और मोनू ने ली थी। उनके बेटे का कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस का शक है कि लेन-देन के विवाद में साथियों ने ही अकरम को मार दिया होगा।
विवेचक राज कुमार गौतम ने कहा कि गुलशाद जब अकरम को ढूंढ़कर थक गई तब उसने अपहरण का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। वह जानती थी कि पुलिस उसके बेटे के बारे में जरूर पता लगा लेगी।
विवेचक ने कहा कि इटावा, कन्नौज और फर्रुखाबाद जाकर ही पता चलेगा कि अकरम के साथ क्या हुआ? वह जिंदा भी है या नहीं।