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गौरी हत्याकांड में आया जबर्दस्त मोड़, कमजोर हुआ केस?

Thu, 16 Apr 2015 08:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Thu, 16 Apr 2015 08:26 PM IST
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gauri murder case, innocent one out from jail

वह किसी मंत्री, नेता या अफसर का बेटा नहीं, न ही किसी अन्ना जैसे का भतीजा है। शायद इसीलिए बेगुनाह होते हुए भी गौरी हत्याकांड में उसे 66 दिन जेल में काटने पड़े। बात हो रही है अमीनाबाद की गौरी श्रीवास्तव को टुकड़े-टुकड़े करने के मुख्य आरोपी हिमांशु प्रजापति के साथ पकड़े गए अनुज गौतम की।

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दिलचस्प यह कि डीजीपी एके जैन ने भी उसे बेगुनाह माना था फिर भी लखनऊ पुलिस अपना ही राग अलाप रही थी। उसके निरीह माता-पिता तकरीबन रोज ही थाना-चौकी पर पुलिसकर्मियों के आगे गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात।
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अंतत: जब ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल शुरू की तब पुलिस ने अनुज की बेगुनाही की रिपोर्ट तैयार करके बुधवार दोपहर बाद सीजेएम कोर्ट में पेश की और कोर्ट ने उसकी रिहाई के आदेश दिए हैं।
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कानून कहता है कि सौ गुनहगार छूट जाएं, पर किसी निर्दोष को सजा न हो। इसके उलट राजधानी पुलिस ने गौरी हत्याकांड में अपनी कहानी सच साबित करने के लिए बगैर ठोस सुबूत के 8 फरवरी को अनुज गौतम को जेल भेज दिया था।

पुलिस ने अनुज को इसलिए भेजा था जेल

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हत्याकांड के आरोप में हिमांशु प्रजापति व अनुज गौतम की गिरफ्तारी के तुरंत बाद आईजी जोन जकी अहमद व डीआईजी रेंज आरके चतुर्वेदी ने पूछताछ की। दोनों अफसरों ने अनुज को बेगुनाह बताया।

आईजी ने एसएसपी को निर्देश दिए कि पुख्ता सुबूत मिलने पर ही अनुज को जेल भेजा जाए, लेकिन राजधानी पुलिस ने आला अफसरों के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए नृशंस हत्याकांड में अनुज को भी जेल भेज दिया।

तर्क था कि मीडिया व अन्य लोगों को विश्वास दिलाने के लिए कम से कम दो आरोपी बनाने जरूरी हैं। सुबूत न मिलने पर अनुज को छुड़ा लिया जाएगा। अनुज का कोई कद्दावर पैरोकार न होने से पुलिस ने फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी।

आदेश पहुंचा, पर नहीं हुई रिहाई

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मां-बाप व बहन पुलिस अफसरों के चक्कर काटती तो कभी जेल में मुलाकात करके अनुज को ढांढस बंधाती थी। गौरी हत्याकांड की तफ्तीश व बेगुनाह अनुज की रिहाई के बारे में ‘अमर उजाला’ ने एक बार फिर आला अफसरों से लेकर एसओ अमीनाबाद तक से सवाल किए।

मामला तूल पकड़ने के आसार देखकर एसओ ने मंगलवार को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 169 के तहत रिपोर्ट तैयार की और बुधवार दोपहर बाद सीजेएम कोर्ट में दाखिल की। सीजेएम ने अनुज की रिहाई के आदेश कर दिए।

जेल अधीक्षक दधिराम मौर्य ने बताया कि अमीनाबाद थाने से 8 फरवरी को गिरफ्तार करके जेल भेजे गए अनुज गौतम की रिहाई का परवाना बुधवार देरशाम जेल पहुंचा। इसके चलते अनुज की बृहस्पतिवार सुबह रिहा किया जाएगा।

ऐसे हुई थी गौरी की नृशंस हत्या

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अमीनाबाद के गणेशगंज इलाके में रहने वाली लॉ की छात्रा गौरी श्रीवास्तव एक फरवरी की दोपहर अपने घर से निकली और लापता हो गई। उसके पिता शिशिर श्रीवास्तव ने देरशाम पुलिस को सूचना दी। इसके बाद अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई।

अगली सुबह पीजीआई इलाके में अज्ञात युवती के शरीर के टुकड़े अलग-अलग स्थान पर मिले। युवती के शरीर के टुकड़ों के साथ मिले कपड़ों के बारे में जानकारी के बाद अमर उजाला संवाददाता ने शिशिर श्रीवास्तव को कॉल करके उनकी बेटी का हुलिया व कपड़ों के बारे में पूछा।

एसओ पीजीआई को भी अमीनाबाद इलाके से लापता गौरी के परिवारीजनों से संपर्क करने को कहा। इस तरह 2 फरवरी की रात गौरी के शव की शिनाख्त हुई।

दोस्ती में दबोचा गया बेगुनाह

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गौरी हत्याकांड के खुलासे के अल्टीमेटम का वक्त पूरा होने के चंद घंटे पहले क्राइम ब्रांच को तेलीबाग इलाके से सुराग लगा। टीम ने गौरी के एक पुराने दोस्त से पूछताछ की। उसके बाद हिमांशु प्रजापति के घर दबिश दी।

घर में घुसते ही दो बाइक खड़ी नजर आई इनमें एक वह बाइक थी जिस पर गौरी एक फरवरी की दोपहर लाटूश रोड से सवार हुई थी और दूसरी बाइक हिमांशु के दोस्त अनुज गौतम की थी।

पुलिस ने हिमांशु से सरसरी तौर पर पूछताछ के साथ अनुज को भी पकड़ लिया। दोनों से रात भर पूछताछ हुई। अनुज अपनी बेगुनाही की दुहाई देता रहा और हिमांशु ने भी उसके हत्या में शामिल न होने का बयान दिया लेकिन पुलिस नहीं मानी।

गहन पूछताछ के बाद आला अफसरों को गौरी हत्याकांड के खुलासे की जानकारी दी गई। आईजी व डीआईजी को भी अनुज बेगुनाह लगा। बैंकिंग की तैयारी कर रहे एमकॉम के प्राइवेट छात्र अनुज के भविष्य को ध्यान में रखकर आईजी ने कहा कि उसके खिलाफ कोई सुबूत मिलने पर ही बंदी बनाया जाए।

घिस गए तलवे, आंखों में सूखे आंसू

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66 दिन से जेल में बंद अनुज गौतम के पिता गंगाप्रसाद गौतम बीमार पड़ गए हैं। बेगुनाह अनुज की पैरवी में मां ममता और बहन रेनू के तलवे घिस गए। आंसू आंखों में ही सूख गए। ममता बताती हैं कि पीजीआई व अमीनाबाद थाने, सीओ, एएसपी, एसएसपी व अन्य अफसरों के दफ्तरों के जाने कितने चक्कर काटे।

कोर्ट में भी पैरवी करने जाती रही, लेकिन पुलिस तवज्जो नहीं दे रही थी। कभी किसी काम में व्यस्तता तो कभी कोई ड्यूटी बताकर टरका देते थे। मां-बेटी पैरवी के साथ अनुज से मुलाकात करने जेल जाती थी।
उसे ढांढस बंधाती और रोते हुए घर लौट आती थी। पूजा ने बताया कि पिछले रविवार को भाई से मुलाकात करने गई। वह बुखार में तप रहा था। समझाया कि बुरे दिन खत्म होने वाले हैं।

जल्दी छूट जाओगे। इसके साथ उसे किताबें देकर कहा था कि परेशान होने की बजाय पढ़ाई करके बैंकिंग की तैयारी में जुटा रहे।

छलके खुशी के आंसू, शुक्रिया ‘अमर उजाला’  

बेगुनाह अनुज को छुड़ाने के लिए दर-दर भटक रहे परिवार ने सोमवार को ‘अमर उजाला’ को दुखड़ा सुनाते हुए मदद की गुहार लगाई थी। अमर उजाला ने बुधवार रात परिवार को अनुज की रिहाई के आदेश की जानकारी दी। बीमार पड़े गंगाप्रसाद की आंखें चमक उठीं। मां ममता और बहन रेनू के खुशी के आंसू छलक उठे। बोली शुक्रिया अमर उजाला।

क्या कहते हैं पुलिस अफसर

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मैंने 8 फरवरी की सुबह हिमांशु प्रजापति व अनुज गौतम से पूछताछ की। गौरी की हत्या में अनुज की संलिप्तता नजर नहीं आई। एसएसपी, एएसपी क्राइम व विवेचक को पुख्ता सुबूत मिलने पर ही अनुज को जेल भेजने के निर्देश दिए थे। किन्हीं कारणों के चलते अनुज को जेल भेजा गया। तफ्तीश में उसके खिलाफ साक्ष्य न मिलने पर पुलिस को धारा 169 के तहत रिपोर्ट देकर अनुज को रिहा कराने के आदेश दिए गए थे।
-जकी अहमद, आईजी जोन

गौरी की नृशंस हत्या के खुलासे के वक्त लगा था कि एक व्यक्ति द्वारा उसे अंजाम दिया जाना संभव नहीं। अनुज गौतम ही मुख्य आरोपी का गहरा दोस्त था। ऐसे में हत्या की उसे जानकारी न होने की बात गले नहीं उतर रही थी। उसे बंदी बनाया गया। तफ्तीश में उसके खिलाफ सुबूत नहीं मिले थे।
-महंथ यादव, तत्कालीन विवेचक/इंस्पेक्टर अमीनाबाद

हत्याकांड की गहन छानबीन में अनुज गौतम के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। गौरी का शव ठिकाने लगाने में कथित संलिप्तता की बात सामने आई लेकिन उसके भी प्रमाण नहीं मिले। ऐसी दशा में अनुज को जेल से रिहा कराने के लिए बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 169 के तहत 173 (2) की आख्या पुलिस प्रपत्र 340 के तहत पेश की गई। कोर्ट ने उसकी रिहाई के आदेश कर दिए हैं।
-सुजीत कुमार उपाध्याय, विवेचक/एसओ अमीनाबाद

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