यूपी: रेलवे भर्ती के नाम पर 5 करोड़ की लूट
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भुवनेश्वर रेलवे में फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने की आड़ में बिजली इंजीनियर के रैकेट ने 90 से अधिक बेरोजगारों को पांच करोड़ रुपये हड़प लिए।
ग्रुप सी और ग्रुप डी में भर्ती के नाम पर यह धोखाधड़ी हुई। इस रैकेट ने अभ्यर्थियों को नकली नियुक्ति पत्र और असली रेलवे पास से प्रशिक्षण के नाम पर भुवनेश्वर, पटना एवं जयपुर तक घुमाया।
अभ्यर्थियों को ठगे जाने का पता तब चला जब रैकेट में शामिल लोग उन्हें एक होटल में छोड़कर फरार हो गए।
केस दर्ज हो गया
अभ्यर्थियों ने गंगा विहार कॉलोनी, चिनहट (लखनऊ) निवासी और कानपुर के पनकी में तैनात पावर कारपोरेशन के जूनियर इंजीनियर प्रदीप कुमार श्रीवास्तव समेत सात लोगों के खिलाफ महानगर, चिनहट और गाजीपुर थानों में अप्रैल और मई में धोखाधड़ी और पैसे हड़पने का केस दर्ज कराया है।
केस दर्ज होने के बाद से ही प्रदीप और उसका ड्राइवर इंदिरानगर निवासी राजू सिंह घर में ताला डालकर परिवार समेत फरार हैं।
तीन महीने पहले ठगी का शिकार होने वाले इंदिरानगर के राहुल सिंह और अविनाश बाल्मीकि, अंबेडकरनगर के भुनेश वर्मा, सीतापुर के पूर्णेश सिंह, फैजाबाद के ओमकार सिंह आदि ने सोमवार को प्रेस क्लब में अपनी व्यथा सुनाई।
रिश्तेदार के साथ मिलकर चलाता था रैकेट
पीड़ितों के काउंसलर कमलेश सिंह का आरोप है कि मास्टरमाइंड प्रदीप का रिश्तेदार एसके श्रीवास्तव उर्फ पवन तिवारी भुवनेश्वर भर्ती बोर्ड में अधिकारी है।
उसी के संरक्षण में प्रदीप इस रैकेट का संचालन कर रहा है। जब पीड़ितों को प्रशिक्षण के नाम पर भुवनेश्वर भर्ती बोर्ड ले जाया गया था तो उनकी मुलाकात एसके श्रीवास्तव से कराई गई थी। इस रैकेट में लखनऊ के भी कुछ कर्मचारी शामिल हैं।
नियुक्ति पत्र नकली लेकिन सफर असली रेलवे पास पर
पीड़ितों का कहना है कि प्रदीप ने पैसे लेकर सभी पीड़ितों को नियुक्ति पत्र तो नकली दिया, लेकिन प्रशिक्षण के नाम पर ट्रेन में सफर असली रेलवे पास से कराया। पीड़ितों ने भुवनेश्वर, जयपुर एवं पटना तक की जिस रेलवे पास से सफर किया उससे टिकट बनवाने के लिये कोई पैसा खर्च नहीं हुआ।