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लखनऊ: सात डॉक्टरों के फर्जी दस्तावेज लगाकर ढाई करोड़ का लोन लिया, पांच जालसाज गिरफ्तार

Sun, 07 Feb 2021 04:52 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 07 Feb 2021 04:52 PM IST
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Five arrested for taking loan on fake documents of doctors in Lucknow.
गिरफ्तार किए गए जालसाज। - फोटो : amar ujala

हजरतगंज पुलिस व साइबर क्राइम सेल ने जालसाजों का ऐसा गिरोह पकड़ा है, जिसने शहर के सात नामी डॉक्टरों के नाम पर फर्जी दस्तावेज लगाकर ढाई करोड़ रुपये का लोन करा लिया। पकड़े गए पांच शातिरों में बजाज फाइनेंस कंपनी के दो और एचसीएल का भी एक कर्मचारी है। जालसाजों से एक लाख रुपये नकदी, पांच आईफोन और कई जाली दस्तावेज मिले हैं। पुलिस मास्टर माइंड की तलाश कर रही है।

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एडीसीपी मध्य चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक बजाज फाइनेंस कंपनी ने कोरोना काल में एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए विशेष लोन स्कीम शुरू की। इसमें डिग्री पर ही कॉल कर लोन दिया जा रहा है। इसके लिए सिर्फ क्रेडिट स्कोर व दस्तावेज की ही जांच की जाती है। इसी दौरान कंपनी ने शहर के दो चिकित्सकों डॉ. शोभित श्रीवास्तव और डॉ. राजेंद्र चौधरी के नाम पर 36 और 35 लाख रुपये का लोन जारी कर दिया।
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इसके कुछ दिन बाद जब डॉक्टरों के पास मेसेज आने शुरू हुए तो उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से मिलकर शिकायत की और लोन न लेने की बात कही। इस पर कंपनी के अधिकारियों ने जांच शुरू कराई। पूरा मामला फर्जी दस्तावेज और जालसाजी से जुड़ा होने से कंपनी की रिस्क कवर यूनिट (आरसीयू) के प्रभारी दिनेश शर्मा को जांच सौंपी गई।
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उन्होंने जालसाजों के खिलाफ हजरतगंज थाने में केस दर्ज कराया। इसकी जांच अतिरिक्त निरीक्षक राजदेव मिश्रा को दी गई। इसमें पता चला कि शातिरों ने पांच और डॉक्टरों के नाम पर एक करोड़ 80 लाख रुपये का फर्जी लोन कराया है।

दबिश पड़ने पर भाग निकले शातिरों के साथी

शातिरों को पकड़ने के लिए प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला ने विवेचक राजदेव मिश्रा के नेतृत्व में हजरतगंज थाने व साइबर क्राइम सेल की टीम भेजी। शनिवार को बजाज फाइनेंस कंपनी के क्रेडिट मैनेजर खरगापुर निवासी ईशान शर्मा, सेल्स मैनेजर अभिमन्यु राय, ओमेक्स सिटी निवासी एचसीएल कर्मचारी रितेश शुक्ला, मोहित कुमार वर्मा और महेंद्र पांडेय उर्फ मुन्ना को गिरफ्तार कर लिया गया।

इनके साथियों को पकड़ने के लिए दबिश दी गई, लेकिन वे भाग निकले। पुलिस के मुताबिक एक लोन के लिए फर्जीवाड़ा करने के लिए जालसाज नया मोबाइल, सिम का इस्तेमाल करते थे। काम होने के बाद मोबाइल व सिम फेंक देते हैं।

क्रेडिट मैनेजर की भूमिका की होगी जांच

पुलिस ने क्रेडिट मैनेजर ईशान शर्मा और सेल्स मैनेजर अभिमन्यु राय से कई बार पूछताछ की। दोनों ने डॉक्टरों के नाम पर लोन कराने में अपनी भूमिका के बारे में कुबूला। पुलिस के मुताबिक ईशान शर्मा की भूमिका अन्य लोन में भी देखी जाएगी। पता लगाया जाएगा कि उसने और कितने लोन में फर्जीवाड़ा किया है।

ऐसे करते थे जालसाजी
साइस क्राइम सेल के प्रभारी मथुरा राय के मुताबिक जालसाजों ने बताया कि नामी डॉक्टरों की फर्जी डिग्री व दस्तावेज तैयार कर लोन के लिए आवेदन देते थे। इसके लिए डॉक्टर के असली मोबाइल नंबर और खाता के बदले शातिर अपना नंबर देकर सीधे बैंक, फाइनेंस कंपनियों से बात करते थे। फिर डॉक्टर के नाम पर फर्जी खाता खोला जाता था। जब अकाउंट में रकम आ जाती तो जालसाज उसे आपस में बांट लेते। जालसाजी में कंपनी के जोनल अधिकारी का भी नाम आया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

डॉक्टर बनने को मिलते थे एक लाख रुपये

जालसाजों में एचसीएल का कर्मचारी रितेश शुक्ला भी है। उसे गिरोह में सिर्फ इसलिए शामिल किया, क्योंकि उसकी अंग्रेजी अच्छी थी। उसे डॉक्टर बनकर कंपनी के सर्वे करने वालों से बातचीत करनी होती थी। इसके लिए उसे दो दिन के एक लाख रुपये दिये जाते थे।

रितेश ही बजाज फाइनेंस कंपनी के अधिकारियों से बात करने के लिए डॉ. राजेंद्र चौधरी, डॉ. शोभित, डॉ. एनएल कुशवाहा, डॉ. ध्रुव और अन्य तीन डॉक्टर भी बना था। रितेश ने पुलिस को बताया कि बहन की शादी के लिए रुपयों की जरूरत थी, इसलिए वह यह काम करने को तैयार हुआ।

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